नेक्स्ट-जेन GST: दरों का युक्तिकरण, बढ़ता संग्रह और 7 अक्तूबर की परिषद बैठक का एजेंडा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने द हिंदू में लिखा है कि “नेक्स्ट-जेन GST” परिवारों को राहत और उद्यमों को वृद्धि दे रहा है, और प्रक्रियागत सुधार आगे आएँगे। दरों में परिवर्तन 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए। उनके अनुसार अक्तूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच रिपोर्ट की गई कर-योग्य आपूर्ति का मूल्य पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25.8% बढ़ा। अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में सकल GST संग्रह ₹12.46 लाख करोड़ रहा, जो वार्षिक आधार पर 11.6% अधिक है।
अगला पड़ाव निकट है। GST परिषद की बैठक 7 अक्तूबर को प्रस्तावित है, जिसमें पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवाद और इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रवाह से जुड़े प्रस्तावों पर विचार होगा। इनका उद्देश्य अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को घटाना है, जो छोटे करदाताओं की सबसे पुरानी शिकायत रही है।
अभ्यर्थियों के लिए GST एक केंद्रीय विषय है। यह सहकारी संघवाद, कर-उत्प्लावकता, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था और व्यापार सुगमता, सभी को स्पर्श करता है। GS-III और GS-II के उत्तरों के लिए आँकड़ों के साथ संस्थागत ढाँचे की समझ आवश्यक है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
GST 1 जुलाई 2017 को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से लागू हुआ और इसने अनेक अप्रत्यक्ष करों की शृंखला को गंतव्य-आधारित, बहु-चरणीय कर से प्रतिस्थापित किया। प्रारंभिक वर्षों में अनेक स्लैब, अनुपालन की जटिलता और राज्यों को क्षतिपूर्ति पर विवाद इसकी पहचान रहे।
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- अनुच्छेद 279A के अंतर्गत GST परिषद का गठन हुआ, जो केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाला संवैधानिक निकाय है और जिसमें राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं।
- अनुच्छेद 246A संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को GST लगाने की समवर्ती शक्ति देता है।
- नेक्स्ट-जेन GST के दर-परिवर्तन 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए, जिनका उद्देश्य दरों को घटाना और युक्तिसंगत बनाना था।
- अप्रैल से सितंबर 2026 में रिफंड के बाद शुद्ध संग्रह 10.4% बढ़ा, और रिफंड लगभग ₹1.80 लाख करोड़ रहे।
- अगस्त 2026 के अंत तक GST पंजीकरण लगभग 1.71 करोड़ थे, जो वार्षिक आधार पर लगभग 15% अधिक है।
संवैधानिक एवं संस्थागत डिज़ाइन
101वें संशोधन ने अनुच्छेद 246A, 269A और 279A जोड़े तथा सातवीं अनुसूची में संशोधन किया। GST परिषद दरों, छूटों, सीमाओं और मॉडल कानूनों पर निर्णय लेती है। उसकी मतदान-व्यवस्था उल्लेखनीय है। केंद्र का भार एक-तिहाई और राज्यों का सम्मिलित भार दो-तिहाई है, और निर्णय के लिए तीन-चौथाई बहुमत आवश्यक है। भारत संघ बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि परिषद की सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, बल्कि प्रेरक हैं, जिससे ढाँचे का सहकारी स्वरूप सुदृढ़ हुआ। विवाद निपटारे के लिए GST अपीलीय अधिकरण की लंबे समय से प्रतीक्षा है।
आर्थिक साक्ष्य एवं राजस्व रुझान
वित्त मंत्री के आँकड़े व्यापक आधार वाली वृद्धि का संकेत देते हैं। रिपोर्ट की गई कर-योग्य आपूर्ति सभी 11 क्षेत्र-समूहों और सभी प्रमुख राज्यों में बढ़ी। उपभोक्ताओं को की गई बिक्री (B2C) में सुधार-पश्चात तुलना में 26.7% की वृद्धि हुई। जून से सितंबर 2026 तक प्रत्येक माह में दोहरे अंक की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। राज्यों की कुल SGST प्राप्तियाँ, IGST निपटान में उनके हिस्से सहित, अप्रैल से सितंबर में लगभग 16% बढ़ीं। अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि के GSTR-3B रिटर्न नियत तिथि तक दाखिल होने में 12.6% की वृद्धि हुई। आलोचनात्मक दृष्टि से यह ध्यान रखना होगा कि ये रिपोर्ट किए गए आँकड़े हैं और वृद्धि का एक भाग औपचारिकीकरण, आधार-प्रभाव तथा कर-चोरी रोधी उपायों के कारण भी हो सकता है, केवल माँग के कारण नहीं। कम दरें राजस्व-तटस्थता का जोखिम भी रखती हैं, जो अब तक के आँकड़ों में दिखाई नहीं दिया है।
अनुपालन का बोझ एवं छोटे उद्यम
लेख स्वीकार करता है कि विकसित होती प्रणाली को छोटे प्रतिभागियों पर पड़ने वाली लागत के प्रति सजग रहना होगा। छोटी फर्मों की कार्यशील पूँजी समय पर इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड पर निर्भर करती है। उनके आँकड़े संकेत देते हैं कि क्रेडिट से चुकाए गए दायित्व का अनुपात बढ़ा और कर-योग्य आपूर्ति की तुलना में संचित क्रेडिट घटा। 7 अक्तूबर को परिषद के समक्ष प्रस्ताव पंजीकरण, रिटर्न और विवादों पर केंद्रित हैं। कंपोज़िशन योजना और QRMP जैसे पूर्व सुधारों ने दाखिले को सरल बनाया, किंतु इनवॉइस मिलान, प्रतिलोम शुल्क ढाँचा और नोटिस अब भी MSME पर बोझ डालते हैं।
संघीय एवं राजकोषीय आयाम
सहकारी संघवाद GST की शक्ति भी है और तनाव-बिंदु भी। राज्यों को क्षतिपूर्ति की व्यवस्था संक्रमण-काल के बाद समाप्त हो गई, अतः राज्य अब संग्रह की उत्प्लावकता पर निर्भर हैं। वित्त मंत्री ने सुधार के डिज़ाइन में सहभागिता के लिए राज्यों को श्रेय दिया है। साथ ही राज्य अधिक राजकोषीय स्थान चाहते हैं, जबकि विभाज्य पूल से बाहर उपकर और अधिभार का केंद्र द्वारा उपयोग निरंतर चिंता का विषय है। सोलहवें वित्त आयोग का हस्तांतरण ढाँचा GST के प्रदर्शन से सीधे जुड़ता है।
बिहार से संबंध
बिहार की जनसंख्या की तुलना में उसका कर-आधार कम है और उसके अपने कर व्यय का केवल एक अंश ही पूरा करते हैं। इसलिए वह केंद्रीय हस्तांतरण पर बहुत निर्भर है, जिसमें पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत उसका हिस्सा लगभग 10% है। बिहार के लिए SGST की उत्प्लावकता और IGST निपटान का हिस्सा महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री का टियर-2 और टियर-3 शहरों पर जोर मुज़फ़्फ़रपुर, गया और भागलपुर जैसे स्थानों के छोटे व्यापारिक समूहों के लिए प्रासंगिक है। सरल पंजीकरण और रिफंड से राज्य के अनौपचारिक व्यापारी औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ सकते हैं।
आगे की राह
परिषद को निश्चित समय-सीमा वाले स्वचालित, जोखिम-आधारित रिफंड अपनाने चाहिए। सूक्ष्म उद्यमों के लिए पंजीकरण को सरल और युक्तिसंगत बनाया जाए। विवाद घटाने के लिए GST अपीलीय अधिकरण को पूर्णतः क्रियाशील किया जाए। प्रतिलोम शुल्क ढाँचे को सुधारा जाए और इनवॉइस-मिलान की त्रुटियाँ दूर हों। परिषद नियमित और विभाजित आँकड़े प्रकाशित करे ताकि रिपोर्ट की गई वृद्धि का स्वतंत्र सत्यापन हो सके। अंत में पेट्रोलियम और बिजली को GST में लाने के लंबित प्रश्न पर राज्यों को स्वीकार्य राजस्व-साझेदारी सूत्र के साथ गंभीर चर्चा हो।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
UPSC: GS-III (अप्रत्यक्ष कर, समावेशी विकास, MSME); GS-II (संघवाद, GST परिषद)। SSC: 101वाँ संशोधन, अनुच्छेद 246A और 279A, GST लागू होने की तिथि और स्लैब, परिषद की संरचना। प्रमुख शब्द: GST परिषद, गंतव्य-आधारित कर, IGST, SGST, इनपुट टैक्स क्रेडिट, GSTR-3B, QRMP, प्रतिलोम शुल्क, GSTAT, कर-उत्प्लावकता, मोहित मिनरल्स।
BPSC प्रासंगिकता
- प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय राजव्यवस्था); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र II (भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय राजव्यवस्था)
- पाठ्यक्रम विषय: भारतीय आर्थिक व्यवस्था; केंद्र–राज्य वित्तीय संबंध
- बिहार संदर्भ: बिहार का कमज़ोर अपना कर आधार, केंद्रीय कर हस्तांतरण में लगभग 10% हिस्सा, और मुज़फ़्फ़रपुर, गया व भागलपुर के छोटे व्यापारियों का औपचारिकीकरण
- संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: संवैधानिक अनुच्छेद और GST परिषद में मतदान; मुख्य: GST और सहकारी संघवाद
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1. भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा लाया गया?
(a) 99वाँ
(b) 100वाँ
(c) 101वाँ
(d) 103वाँ
प्रश्न 2. GST परिषद में निर्णय के लिए भारित मतों के कम से कम तीन-चौथाई बहुमत की आवश्यकता होती है। केंद्र सरकार के मत का भार कितना है?
(a) आधा
(b) एक-तिहाई
(c) दो-तिहाई
(d) एक-चौथाई
प्रश्न 3. संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को GST पर कानून बनाने की शक्ति देता है?
(a) अनुच्छेद 246A
(b) अनुच्छेद 269A
(c) अनुच्छेद 279A
(d) अनुच्छेद 280
उत्तर और व्याख्या देखें
प्रश्न 1: (c) संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 द्वारा GST लाया गया, जो 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ।
प्रश्न 2: (b) अनुच्छेद 279A के अनुसार केंद्र के मत का भार एक-तिहाई और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई है।
प्रश्न 3: (a) अनुच्छेद 246A GST लगाने की समवर्ती शक्ति देता है। अनुच्छेद 269A अंतरराज्यीय आपूर्ति (IGST) से और अनुच्छेद 279A GST परिषद से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
GST को सहकारी संघवाद के साधन के रूप में बनाया गया था, लेकिन बिहार जैसे राज्यों के पास अब भी सीमित वित्तीय गुंजाइश है। कम आय वाले राज्य के दृष्टिकोण से GST की उपलब्धियों और कमियों की समीक्षा कीजिए। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)