इस्लामाबाद में SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में भारत: बहुपक्षवाद, पाकिस्तान और तुर्किये का प्रश्न

पाकिस्तान ने इस सप्ताह घोषणा की कि वह अगस्त 2027 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, और इसी बीच विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद में SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की तैयारी बैठक में भाग लिया। पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की यह पहली आधिकारिक भारतीय यात्रा है। तीन दिवसीय बैठक सोमवार को आरंभ हुई, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में आतंकवाद और कश्मीर पर भारत तथा पाकिस्तान एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा चुके थे।

भारत का प्रतिनिधित्व संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय एवं आर्थिक संबंध) आलोक डिमरी ने किया, जो पाकिस्तान की 2026-27 की अध्यक्षता में हुई अन्य बैठकों की तुलना में उच्चतर स्तर है। सितंबर के मध्य में इस्लामाबाद में SCO क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केवल कार्यवाहक उच्चायुक्त स्तर पर था। भारतीय अधिकारियों का आग्रह है कि समन्वयकों की बैठक बहुपक्षीय प्रारूप में थी और उसका कोई द्विपक्षीय महत्व नहीं है, तथापि इससे मंत्रिस्तरीय बैठकों और शासनाध्यक्ष परिषद की उस बैठक में उच्च स्तरीय भागीदारी का मार्ग खुला रहता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है।

💡 Get AI-powered exam prep on your phone!

Download ExamYaari App

यह विषय UPSC के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह परखता है कि भारत पाकिस्तान के प्रति अपनी सुरक्षा मुद्रा और यूरेशियाई बहुपक्षवाद में अपने हितों के बीच संतुलन कैसे साधता है, तथा तुर्किये जैसे नए सदस्यों का प्रवेश समूह की गतिशीलता को कैसे बदल सकता है।

पृष्ठभूमि एवं संदर्भ

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • पाकिस्तान “दृष्टि को कार्य में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि” विषय के अंतर्गत 2026-27 के लिए SCO की अध्यक्षता कर रहा है और अगस्त 2027 में राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा।
  • इस्लामाबाद में संयुक्त सचिव स्तर की भारतीय भागीदारी ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली आधिकारिक यात्रा है, यद्यपि अधिकारी इसे विशुद्ध बहुपक्षीय बताते हैं।
  • तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने कहा है कि तुर्किये वर्तमान पर्यवेक्षक दर्जे से उच्चतर स्तर की सहभागिता चाहेगा, जो अगले वर्ष पूर्ण सदस्यता के अनुरोध का संकेत है।
  • भारत ने UNGA में एर्दोआन के कश्मीर संबंधी उल्लेख को अस्वीकार किया, जबकि विदेश मंत्रालय ने कहा कि सदस्यता का प्रश्न SCO सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से तय होगा।
  • भारत ने अब तक दिल्ली और इस्लामाबाद, दोनों में SCO की नेताओं की बैठकों से दूरी बनाए रखी है, और 2023 का शासनाध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन उसने आभासी रूप में आयोजित किया था।

SCO: उद्भव एवं संरचना

SCO का विकास 1990 के दशक के ‘शंघाई फ़ाइव’ से हुआ, जिसने चीन, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान के बीच सीमा तथा विश्वास-निर्माण के मुद्दे सुलझाए, और 2001 में उज़्बेकिस्तान के साथ इसकी औपचारिक स्थापना हुई। भारत और पाकिस्तान 2017 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य बने, ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में जुड़े, जिससे यह दस सदस्यीय समूह बना। राष्ट्राध्यक्ष परिषद सर्वोच्च निकाय है, जिसे शासनाध्यक्ष परिषद, विदेश मंत्रियों की परिषद, राष्ट्रीय समन्वयक तथा बीजिंग स्थित सचिवालय का सहयोग प्राप्त है। ताशकंद स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) सुरक्षा सहयोग का संचालन करती है। SCO को प्रायः आम सहमति से चलने वाला संगठन कहा जाता है, जो प्रत्येक सदस्य को प्रभावी वीटो देता है और उसके घोषणा-पत्रों को न्यूनतम साझा सहमति के दस्तावेज़ बना देता है।

SCO में भारत के सामरिक हित

भारत SCO में मध्य एशिया से जुड़ने, जिसे वह अपना विस्तारित पड़ोस मानता है, समावेशी मंच के माध्यम से चीनी प्रभाव का संतुलन करने तथा आतंकवाद पर अपनी चिंताओं के लिए मंच पाने हेतु शामिल हुआ। 2012 की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति ने ऊर्जा, संपर्क और सांस्कृतिक संबंध गहरे करने का प्रयास किया, यद्यपि पाकिस्तान के कारण भारत को प्रत्यक्ष भू-मार्ग उपलब्ध नहीं है। भारत ने सीमा-पार आतंकवाद पर कठोर भाषा के लिए SCO का उपयोग किया है, और 2025 में उसने रक्षा मंत्रियों के उस संयुक्त पाठ पर हस्ताक्षर से इनकार किया जिसमें पहलगाम हमले का विशिष्ट उल्लेख नहीं था, जबकि बाद की तियानजिन घोषणा में उस हमले की निंदा की गई। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाक-अधिकृत कश्मीर से गुज़रकर भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, इसलिए भारत बेल्ट एंड रोड पहल का समर्थन भी नहीं करता।

द्विपक्षीय संबंधों की छाया

पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर और 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के बाद पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध ठहराव में हैं। इस्लामाबाद में भागीदारी इसलिए सावधान आकलन की माँग करती है: पूरी तरह दूर रहने से उस संगठन में, जिसका भारत पूर्ण सदस्य है, चीन और पाकिस्तान को स्थान मिल जाएगा, जबकि उच्च स्तर पर उपस्थिति उस सामान्यीकरण का संकेत देगी जिसका नई दिल्ली का कोई इरादा नहीं है। बहुपक्षीय प्रारूप में मध्यम स्तर के अधिकारी को भेजना एक सुविचारित मध्यम मार्ग है। पूर्व उदाहरणों में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2023 में राष्ट्राध्यक्ष परिषद की आभासी मेज़बानी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का 2024 में इस्लामाबाद में शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में भाग लेना शामिल है, जब उन्होंने स्पष्ट किया था कि यात्रा द्विपक्षीय वार्ता के लिए नहीं है।

तुर्किये कारक

तुर्किये संवाद भागीदार है और उसने SCO के साथ गहरे संबंध चाहे हैं। भारत की असहजता अंकारा के पाकिस्तान से निकट गठजोड़ से उपजती है, जिसमें रक्षा सहयोग तथा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के बार-बार उल्लेख शामिल हैं। नए सदस्य आम सहमति से स्वीकार किए जाते हैं, अतः सिद्धांततः भारत तुर्किये की सदस्यता रोक सकता है, किंतु विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रुख से परहेज़ करते हुए केवल इतना कहा कि यह सदस्यों को सामूहिक रूप से तय करना है। यह संयम इस इच्छा को दर्शाता है कि भारत ऐसे संगठन में बाधक न दिखे जहाँ चीन और रूस विस्तार को महत्व देते हैं। परिणाम इस पर निर्भर करेगा कि भारतीय कूटनीति तुर्किये के साथ द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक SCO हितों के सापेक्ष कैसे तौलती है।

क्षेत्रीय सुरक्षा संदर्भ

यह बैठक ईरान युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान की पृष्ठभूमि में हो रही है, जबकि ईरान अब SCO का सदस्य है, साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है। ऊर्जा सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से संपर्क और चाबहार बंदरगाह सभी प्रभावित हैं। अफ़ग़ानिस्तान साझा सुरक्षा चिंता बना हुआ है, जिस पर SCO का संपर्क समूह निष्क्रिय है। दक्षिण एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव और उभरता रूस-चीन-पाकिस्तान अभिसरण भारत की एजेंडा निर्धारित करने की क्षमता की परीक्षा लेते हैं।

बिहार से संबंध

बिहार का पश्चिम एशियाई स्थिरता में प्रत्यक्ष हित है, क्योंकि उसके बड़ी संख्या में श्रमिक खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कार्यरत हैं और घर पर पर्याप्त धन भेजते हैं; खाड़ी और होर्मुज़ में व्यवधान सिवान, गोपालगंज और सारण जैसे जनपदों के परिवारों को प्रभावित करता है। बिहार बौद्ध धर्म की जन्मस्थली भी है, और बोधगया, राजगीर तथा नालंदा साझा बौद्ध विरासत के माध्यम से भारत को मध्य एशिया, चीन और मंगोलिया से जोड़ते हैं; अतः SCO से जुड़ा सांस्कृतिक व पर्यटन सहयोग राज्य के लिए सॉफ़्ट पावर का मार्ग बन सकता है। क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि से बिहार के उर्वरक और विद्युत क्षेत्रों को भी लाभ होगा।

तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) भी वियतनाम और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी राज्यों को एक साथ लाता है और आम सहमति तथा अहस्तक्षेप के माध्यम से मतभेद संभालता है। SCO में समान विशेषताएँ हैं, किंतु उसका सुरक्षा-उन्मुख झुकाव अधिक प्रबल है। क्वाड और ब्रिक्स भारत की बहु-संरेखण नीति को दर्शाते हैं, जिसमें वह भिन्न सामरिक झुकाव वाले समूहों में भाग लेता है। आसियान के विपरीत SCO के पास सदस्यों के द्विपक्षीय विवाद सुलझाने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है, जैसा भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन मतभेदों से स्पष्ट है।

आगे की राह

भारत को तकनीकी और समन्वयक स्तर की बैठकों में उपस्थित रहना चाहिए, इस सिद्धांत को बनाए रखते हुए कि बहुपक्षीय भागीदारी द्विपक्षीय संवाद से भिन्न है। उसे SCO मंच का उपयोग सुदृढ़ और असंदिग्ध आतंकवाद-रोधी पाठ के आग्रह तथा आतंक-वित्तपोषण के विरुद्ध RATS को प्रभावी बनाने के लिए करना चाहिए। कूटनीति को बेल्ट एंड रोड पहल के विकल्प के रूप में चाबहार और INSTC के माध्यम से संपर्क को आगे बढ़ाना चाहिए। तुर्किये के प्रश्न पर भारत को रूस तथा मध्य एशियाई देशों सहित ऐसे सदस्यों का गठबंधन बनाना चाहिए जो आम सहमति और संप्रभुता के सम्मान पर बल देते हैं। अंततः भारत को ऊर्जा, औषधि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और कौशल विकास पर मध्य एशियाई गणराज्यों से द्विपक्षीय संपर्क गहरा करना चाहिए, ताकि उसकी SCO भूमिका ठोस साझेदारियों पर आधारित हो।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

UPSC: GS-II (भारत एवं उसका पड़ोस, भारत से संबंधित समूह और समझौते, द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय समूह, अन्य देशों की नीतियों का भारत पर प्रभाव); निबंध (बहुपक्षवाद बनाम द्विपक्षवाद)। SSC: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (SCO के सदस्य, मुख्यालय बीजिंग, ताशकंद में RATS, स्थापना वर्ष 2001)। प्रमुख शब्द: शंघाई फ़ाइव, SCO-RATS, राष्ट्रीय समन्वयक, राष्ट्राध्यक्ष परिषद, पर्यवेक्षक बनाम सदस्य, कनेक्ट सेंट्रल एशिया, CPEC, INSTC, चाबहार, आम सहमति का सिद्धांत।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *