भारत-विशिष्ट सिकल सेल गंभीरता स्कोर (ISS1 और ISS2): परिशुद्ध जन-स्वास्थ्य की दिशा में CSIR-CCMB का कदम

हैदराबाद स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CSIR-CCMB) के वैज्ञानिकों ने सिकल सेल एनीमिया (SCA) के लिए भारत-विशिष्ट रोग-गंभीरता स्कोर विकसित किया है। यह उपकरण भारतीय बच्चों के चिकित्सकीय आँकड़ों पर आधारित है और चिकित्सकों को यह अनुमान लगाने में सहायता करता है कि रोग किसी रोगी को कितनी गंभीरता से प्रभावित करेगा।

यह विकास इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय स्कोरिंग प्रणालियाँ मुख्यतः अफ्रीकी समूहों के आधार पर बनी थीं और भारतीय रोगियों की चिकित्सकीय प्रोफ़ाइल से मेल नहीं खातीं। बताया जाता है कि भारतीय रोगियों में रोग कई अफ्रीकी आबादियों की तुलना में हल्का होता है। यह अध्ययन CSIR-CCMB के चिकित्सक-वैज्ञानिक और सर जे.सी. बोस फ़ेलो गिरिराज आर. चंदक ने सुराज एस. नोंगमैथेम और दिप्ति जैन सहित सहकर्मियों के साथ किया।

💡 Get AI-powered exam prep on your phone!

Download ExamYaari App

अभ्यर्थियों के लिए यह विषय जीनोमिक्स, जन-स्वास्थ्य नीति और राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को जोड़ता है, जो GS-III विज्ञान-प्रौद्योगिकी और GS-II स्वास्थ्य में बार-बार आने वाला विषय है।

पृष्ठभूमि एवं संदर्भ

SCA एक वंशानुगत रक्त-विकार है जो बीटा-ग्लोबिन जीन में उत्परिवर्तन से होता है। इससे असामान्य हीमोग्लोबिन बनता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को हँसिया-आकार देता है। परिणामस्वरूप रक्ताल्पता, पीड़ादायक दौरे, अंगों की क्षति और अन्य जटिलताएँ होती हैं। भारत में इसका बोझ विश्व में सर्वाधिक में है, जो मध्य और पश्चिमी जनजातीय पट्टियों में केंद्रित है।

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • संशोधित मॉडल ISS1 चिकित्सकीय मूल्यांकन की संगति (concordance) को लगभग 83 प्रतिशत तक सुधारता है।
  • दूसरा संस्करण ISS2 प्रयोगशाला-मापनों के स्थान पर सहज अवलोकनीय चिकित्सकीय संकेतकों का प्रयोग करता है और लगभग 85 प्रतिशत संगति प्राप्त करता है।
  • ISS2 से चिकित्सक बहुत सी प्रयोगशाला-जाँचों के बिना उपचार तय कर सकते हैं, जो सीमित संसाधन वाले स्थानों के अनुकूल है।
  • यह उपकरण भारतीय बच्चों के चिकित्सकीय आँकड़ों से बना है क्योंकि मौजूदा स्कोर भारत की चिकित्सकीय प्रोफ़ाइल को नहीं दर्शाते।
  • 2023 में शुरू राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन का लक्ष्य 2047 तक इसे जन-स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है।

गंभीरता-स्कोरिंग का वैज्ञानिक आधार

SCA में एक ही उत्परिवर्तन वाले रोगियों में भी गंभीरता व्यापक रूप से भिन्न होती है। भ्रूणीय हीमोग्लोबिन का उच्च स्तर और साथ-साथ विरासत में मिला अल्फा-थैलेसीमिया जैसे आनुवंशिक संशोधक परिणामों को प्रभावित करते हैं, और कुछ हैप्लोटाइप हल्के रोग से जुड़े हैं। गंभीरता-स्कोर दर्द-संकटों की आवृत्ति, अस्पताल-भर्ती और रक्ताधान जैसे चिकित्सकीय इतिहास को मानकीकृत संख्या में बदलता है, ताकि हाइड्रॉक्सीयूरिया की खुराक और रक्ताधान-योजना जैसी उपचार-तीव्रता को ज़रूरत के अनुसार तय किया जा सके।

नीतिगत ढाँचा

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 1 जुलाई 2023 को आरंभ हुआ, जिसका उद्देश्य अनेक राज्यों के उच्च-प्रसार वाले ज़िलों में 0 से 40 वर्ष आयु की बड़ी आबादी की जाँच, परामर्श और देखभाल है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 सिकल सेल रोग को निर्दिष्ट दिव्यांगता के रूप में मान्यता देता है, जिससे रोगियों को लाभ मिलते हैं। हाइड्रॉक्सीयूरिया सार्वजनिक प्रणाली में उपलब्ध है और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) तथा CSIR ने इस रोग के लिए जीन-चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाया है।

आर्थिक एवं स्वास्थ्य-तंत्र पर प्रभाव

गंभीरता-स्कोर संसाधन-आवंटन में सुधार ला सकते हैं। हल्की प्रोफ़ाइल वाले रोगियों को कम गहन निगरानी की आवश्यकता हो सकती है, जबकि उच्च-जोखिम रोगियों को हाइड्रॉक्सीयूरिया, रक्ताधान कार्यक्रमों और अंततः उपचारात्मक चिकित्साओं के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है। ISS2 की चिकित्सकीय संकेतकों पर निर्भरता लागत घटाती है और इसका प्रयोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हो सकता है, जो आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अनुरूप है।

शासन एवं संस्थागत मुद्दे

भारत की SCA-प्रतिक्रिया को खंडित देखभाल, सीमित रक्त-कोष क्षमता और जनजातीय ज़िलों में कमज़ोर अनुवर्ती कार्रवाई से जूझना होगा। आँकड़ों की गुणवत्ता भी समस्या है, क्योंकि नया स्कोर बाल-चिकित्सा आँकड़ों पर बना है और वयस्कों, राज्यों तथा जीनोटाइप में उसका सत्यापन आवश्यक है। आनुवंशिक जाँच से गोपनीयता और कलंक की चिंताएँ भी जुड़ी हैं, विशेषकर विवाह-परामर्श के संदर्भ में।

सामाजिक प्रभाव

SCA अनुसूचित जनजातियों और अन्य वंचित समूहों को अनुपातहीन रूप से प्रभावित करता है, जिनकी स्वास्थ्य-सेवाओं तक पहुँच सीमित है। वंशानुगत रोग से जुड़ा कलंक और बार-बार अस्पताल-भर्ती का आर्थिक बोझ निर्धनता को बढ़ाते हैं। अनुकूलित उपकरण चिकित्सकों को कम-उपचार और अधिक-उपचार, दोनों से बचने में मदद करता है।

तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य

अमेरिका में नवजात शिशुओं की सिकल सेल जाँच सार्वभौमिक है और हाइड्रॉक्सीयूरिया मानक उपचार है। नाइजीरिया में विश्व का सबसे बड़ा रोग-बोझ है, और घाना सहित कुछ अफ्रीकी देशों ने नवजात-जाँच कार्यक्रम बनाए हैं। जीन-चिकित्साओं को अमेरिका और ब्रिटेन में मंज़ूरी मिली है, पर वे बहुत महँगी हैं, इसीलिए भारत ने CSIR संस्थानों के माध्यम से स्वदेशी जीन-संपादन अनुसंधान को आगे बढ़ाया है।

बिहार से संबंध

बिहार सर्वाधिक रोग-बोझ वाले राज्यों में नहीं है, परंतु कुछ क्षेत्रों में सिकल सेल के मामले मिलते हैं, और झारखंड से लगी सीमा तथा क्षेत्र के जनजातीय समुदायों पर ध्यान देना उचित है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को ज़िला-स्तरीय जाँच-आँकड़ों की आवश्यकता है, और गंभीरता-स्कोर पटना जैसे चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सकों के काम आ सकता है। बिहार में रक्ताल्पता से प्रभावित आबादी बड़ी है, इसलिए आयरन-कमी कार्यक्रमों के साथ हीमोग्लोबिनोपैथी की जाँच और रेफ़रल को सुदृढ़ करना विवेकपूर्ण होगा।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने से पहले ISS1 और ISS2 का वयस्क और बहु-राज्य समूहों में सत्यापन हो।
  • ISS2 को आयुष्मान भारत की प्राथमिक देखभाल प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में एकीकृत किया जाए।
  • नवजात जाँच का विस्तार हो और हाइड्रॉक्सीयूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • कलंक रोकने के लिए सुरक्षित, सहमति-आधारित आनुवंशिक डेटा शासन-व्यवस्था बने।
  • कम लागत पर स्वदेशी जीन-चिकित्सा और अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण क्षमता में निवेश हो।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

UPSC: GS-III: जैव-प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, स्वदेशी प्रौद्योगिकी। GS-II: स्वास्थ्य नीति और संवेदनशील वर्ग। निबंध: समावेशी विकास के लिए विज्ञान।

SSC: CSIR, CCMB, सिकल सेल एनीमिया, हीमोग्लोबिन, राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, RPwD अधिनियम 2016।

प्रमुख शब्द: ISS1, ISS2, बीटा-ग्लोबिन, हाइड्रॉक्सीयूरिया, भ्रूणीय हीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिनोपैथी, संगति (concordance), परिशुद्ध चिकित्सा।

BPSC प्रासंगिकता

  • प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (सामान्य विज्ञान, समसामयिकी); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र II (भारत के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका)
  • पाठ्यक्रम विषय: जीव विज्ञान और स्वास्थ्य; जन स्वास्थ्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • बिहार संदर्भ: झारखंड सीमा से लगे आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल और अन्य हीमोग्लोबिन विकारों की जाँच, बिहार के एनीमिया कार्यक्रमों के साथ
  • संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: रोग–कारण या मिशन–लक्ष्य का मिलान; मुख्य: परिशुद्ध जन स्वास्थ्य

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ

प्रश्न 1. सिकल सेल एनीमिया किस जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है?
(a) अल्फ़ा ग्लोबिन
(b) बीटा ग्लोबिन
(c) फ़ाइब्रिनोजन
(d) इंसुलिन

प्रश्न 2. जुलाई 2023 में शुरू हुए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन का लक्ष्य किस वर्ष तक इसे जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है?
(a) 2030
(b) 2035
(c) 2047
(d) 2050

प्रश्न 3. CSIR की प्रयोगशाला कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CCMB) कहाँ स्थित है?
(a) पुणे
(b) बेंगलुरु
(c) हैदराबाद
(d) लखनऊ

उत्तर और व्याख्या देखें

प्रश्न 1: (b) बीटा ग्लोबिन जीन में एक उत्परिवर्तन से असामान्य हीमोग्लोबिन (HbS) बनता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिए के आकार की हो जाती हैं।

प्रश्न 2: (c) यह मिशन 1 जुलाई 2023 को शुरू हुआ और इसका लक्ष्य 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है।

प्रश्न 3: (c) CSIR-CCMB हैदराबाद, तेलंगाना में है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

परिशुद्ध जन स्वास्थ्य (precision public health) क्या है? सिकल सेल एनीमिया के लिए भारत-विशिष्ट गंभीरता स्कोर के उदाहरण से समझाइए और भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए इसकी प्रासंगिकता बताइए। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *