गोबरधन योजना: संपीड़ित बायोगैस बढ़ाने और ईंधन आयात घटाने हेतु ₹23,731 करोड़
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में ₹23,731 करोड़ की गोबरधन योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। योजना का लक्ष्य कृषि और जैविक अपशिष्ट को घरेलू ऊर्जा-स्रोत में बदलकर संपीड़ित बायोगैस (CBG) का उत्पादन दस गुना बढ़ाना है, यानी लगभग 0.4 मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन (mmscmd) से 4-6 mmscmd तक।
सरकार के अनुसार योजना से ईंधन आयात में ₹40,000 करोड़ से अधिक की बचत होगी, सकल घरेलू उत्पाद में ₹75,000 करोड़ से अधिक का योगदान जुड़ेगा और 1.5 लाख से अधिक रोज़गार सृजित होंगे। श्री पुरी ने इसे किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने वाला कदम बताया।
यह योजना ऊर्जा-सुरक्षा, अपशिष्ट-प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के संगम पर स्थित है। ऊर्जा, पर्यावरण और कृषि पर GS-III के उत्तरों के लिए यह प्रासंगिक है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
गोबरधन (गैल्वनाइज़िंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज़ धन) 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत आरंभ हुआ, जिसका उद्देश्य पशुओं के गोबर और जैविक अपशिष्ट से बायोगैस और खाद बनाना है। सैटैट (SATAT) पहल (2018) में उद्यमियों को तेल विपणन कंपनियों की ख़रीद-गारंटी के साथ CBG संयंत्र लगाने के लिए आमंत्रित किया गया। नई योजना पूँजी-सहायता और सुनिश्चित ख़रीद, दोनों जोड़ती है।
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- योजना दो पात्र घटकों में प्रति CBG परियोजना अधिकतम ₹30 करोड़ की पूँजी-सहायता देती है।
- नए (ग्रीनफ़ील्ड) संयंत्रों को पात्र CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) ₹1.25 करोड़ मिलते हैं, और विस्तार (ब्राउनफ़ील्ड) को उस दर का 50 प्रतिशत।
- CBG बनाने के लिए उन्नत किए गए मौजूदा बायोगैस संयंत्रों को प्रति TPD ₹0.60 करोड़ मिल सकते हैं, जिसकी सीमा प्रति परियोजना ₹5 करोड़ है।
- उत्पादकों को ₹2,110 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (लगभग ₹98 प्रति किलो) के प्रशासित मूल्य पर पात्र उत्पादन की 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित ख़रीद का आश्वासन है।
- लक्ष्य 2030 तक भारत की ऊर्जा-टोकरी में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6-7 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना है।
नीतिगत संरचना
योजना आपूर्ति-पक्ष सहायता (पूँजी-अनुदान) को माँग-पक्ष निश्चितता (प्रशासित मूल्य पर सुनिश्चित ख़रीद) से जोड़ती है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि CBG परियोजनाएँ अब तक अनिश्चित मूल्य और धीमी ख़रीद से जूझती रही हैं। पहले अधिसूचित संपीड़ित बायोगैस मिश्रण-दायित्व नगर गैस वितरण और परिवहन ईंधन में CBG की बढ़ती हिस्सेदारी अनिवार्य करता है, जिससे वैधानिक माँग-आधार बनता है। योजना उप-उत्पाद किण्वित जैविक खाद (FOM) का बाज़ार भी बनाती है, जो उर्वरक नीति से जुड़ता है।
आर्थिक निहितार्थ
भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का बड़ा हिस्सा और प्राकृतिक गैस का भी उल्लेखनीय अंश आयात करता है, इसलिए आयात-बिल भू-राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है। योजना का अनुमान लगभग 10 मिलियन टन जीवाश्म ईंधन के प्रतिस्थापन और 40 मिलियन टन से अधिक CO2 उत्सर्जन में कमी का है। साथ ही लगभग 250 मिलियन टन जैविक खाद का अनुमान है, जो रासायनिक उर्वरक के प्रयोग को घटा सकती है। प्रशासित मूल्य राजस्व-निश्चितता देता है, पर यदि लागत और गैस-मूल्य अलग दिशाओं में जाएँ तो राजकोष पर जोखिम भी बनता है।
पर्यावरणीय आयाम
धान और गेहूँ के अवशेष जलाना उत्तर भारत के वायु-प्रदूषण में योगदान देता है, और CBG अवशेषों का उत्पादक वैकल्पिक उपयोग देता है। गोबर और जैविक कचरे से कैप्चर की गई मीथेन एक प्रबल ग्रीनहाउस गैस को वायुमंडल में जाने से रोकती है, जिससे भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) और 2070 शुद्ध-शून्य लक्ष्य को बल मिलता है। योजना चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्वच्छ भारत के ठोस-अपशिष्ट उद्देश्यों को भी सुदृढ़ करती है।
शासन एवं क्रियान्वयन की चुनौतियाँ
कई चुनौतियाँ स्पष्ट हैं। कच्चे माल की आपूर्ति-शृंखला कठिन है, क्योंकि गोबर और अवशेष बिखरे हुए, मौसमी और कम ऊर्जा-घनत्व वाले हैं, जिससे संग्रहण-लागत बढ़ती है। संयंत्र की आर्थिकी गैस की गुणवत्ता, पाइपलाइन संपर्क और संपीड़न अवसंरचना पर निर्भर है। भूमि, पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ और बैंक वित्त परियोजना-विकास को धीमा करते हैं। किसान सब्सिडी वाले रासायनिक उर्वरकों के आदी हैं, इसलिए डाइजेस्टेट की गुणवत्ता और FOM की स्वीकार्यता अनिश्चित है। अंततः, आवधिक समीक्षा के बिना प्रशासित मूल्य विकृतिकारी बन सकता है।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य
जर्मनी में फ़ीड-इन टैरिफ़ पर आधारित बड़ा बायोगैस क्षेत्र है, हालाँकि लागत के कारण वह बाद में बाज़ार-आधारित सहायता की ओर बढ़ा। स्वीडन बायोगैस का व्यापक उपयोग वाहन-ईंधन के रूप में करता है, और डेनमार्क अपने गैस-ग्रिड में बायोमीथेन का बड़ा हिस्सा डालता है। चीन ने घरेलू डाइजेस्टर बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ाए। ये उदाहरण दिखाते हैं कि स्थिर नीति और कच्चे माल का समेकन सफलता तय करते हैं।
बिहार से संबंध
बिहार में पशुधन की बड़ी संख्या, सुधा जैसी सशक्त दुग्ध सहकारी समितियाँ, धान, गेहूँ और मक्का के प्रचुर अवशेष और चंपारण क्षेत्र में गन्ना-आधारित उद्योग हैं। दुग्ध सहकारी समितियाँ और चीनी मिलें अपने प्रेसमड के साथ स्वाभाविक कच्चा-माल समेकक हैं। बिहार में गैस-ग्रिड संपर्क पश्चिमी राज्यों की तुलना में आरंभिक अवस्था में है, इसलिए स्थानीय नगर गैस नेटवर्क और ईंधन-स्टेशनों को विकेंद्रीकृत CBG आपूर्ति एक यथार्थवादी मार्ग है। बायोगैस बाढ़-प्रवण भूमि के किसानों की आय के विविधीकरण में भी सहायक हो सकती है।
आगे की राह
- दुग्ध सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों और चीनी मिलों के माध्यम से ज़िला-स्तर पर कच्चे माल का समेकन हो।
- प्रशासित मूल्य की गैस-बाज़ार संकेतकों के आधार पर आवधिक समीक्षा हो।
- पाइपलाइन अंतर्संयोजन बढ़े और नगर गैस वितरक मिश्रण-दायित्व का पालन सुनिश्चित करें।
- उर्वरक नीति से एकीकरण, गुणवत्ता मानकों और किसान प्रदर्शनों द्वारा FOM को बढ़ावा दिया जाए।
- एकल-खिड़की स्वीकृतियों से परियोजना-अवधि घटाई जाए।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
UPSC: GS-III: ऊर्जा-सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण और अपशिष्ट-प्रबंधन, कृषि। GS-II: सरकारी योजनाएँ। निबंध: कचरे से कंचन।
SSC: गोबरधन, SATAT, CBG, बायोगैस, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय।
प्रमुख शब्द: CBG, TPD, mmscmd, FOM, मिश्रण-दायित्व, ब्राउनफ़ील्ड व ग्रीनफ़ील्ड, प्रशासित मूल्य, शुद्ध-शून्य 2070।
BPSC प्रासंगिकता
- प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (समसामयिकी, सामान्य विज्ञान); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र II (भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका)
- पाठ्यक्रम विषय: ऊर्जा सुरक्षा, सरकारी योजनाएँ और अपशिष्ट प्रबंधन
- बिहार संदर्भ: बिहार के बड़े पशुधन, सुधा डेयरी सहकारी संस्थाओं, फसल अवशेष और चंपारण की चीनी मिलों से कच्चा माल
- संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: योजना–मंत्रालय या योजना–उद्देश्य का मिलान; मुख्य: अपशिष्ट से ऊर्जा और ग्रामीण आय
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1. 2018 में शुरू की गई गोबरधन योजना मूल रूप से किस कार्यक्रम का हिस्सा थी?
(a) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
(b) स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
(c) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
(d) राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम
प्रश्न 2. SATAT पहल किससे संबंधित है?
(a) किसानों के लिए सौर पंप
(b) तेल कंपनियों की सुनिश्चित ख़रीद के साथ संपीड़ित बायोगैस संयंत्र
(c) पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण
(d) इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग
प्रश्न 3. भारत ने किस वर्ष तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया है?
(a) 2050
(b) 2060
(c) 2070
(d) 2080
उत्तर और व्याख्या देखें
प्रश्न 1: (b) गोबरधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गोबर और जैविक कचरे को बायोगैस और खाद में बदलने के लिए शुरू की गई।
प्रश्न 2: (b) 2018 में शुरू की गई SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल के तहत उद्यमी संपीड़ित बायोगैस संयंत्र लगाते हैं और तेल विपणन कंपनियाँ गैस ख़रीदती हैं।
प्रश्न 3: (c) भारत ने 2021 में ग्लासगो में COP26 के दौरान 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य घोषित किया।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
संपीड़ित बायोगैस कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा और आय में बदल सकती है। बिहार के लिए गोबरधन जैसी योजनाओं की संभावनाओं और उन्हें लागू करने की चुनौतियों का आकलन कीजिए। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)