एल नीनो, 13 प्रतिशत मानसून घाटा और आईएमडी पूर्वानुमान की सीमाएँ

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 सितंबर को घोषणा की कि मानसून का संचयी आँकड़ा देश भर में 759 मिमी रहा, जो सामान्य 869 मिमी का 87 प्रतिशत है। लगभग 12 से 13 प्रतिशत की यह कमी एल नीनो वर्ष में आई है, जब मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत के गर्म होने से मानसूनी वर्षा दब जाती है। आईएमडी ने अप्रैल और मई के पूर्वानुमानों में दीर्घावधि औसत (LPA) के 90 से 95 प्रतिशत की “सामान्य से कम” वर्षा बताई थी, यद्यपि उसके मॉडल 90 प्रतिशत से नीचे “अपर्याप्त” वर्षा की ओर संकेत कर रहे थे।

द हिंदू के संपादकीय के अनुसार आईएमडी तकनीकी सफलता का दावा कर सकता है क्योंकि अंतिम आँकड़ा उसकी 4 से 5 प्रतिशत की त्रुटि-सीमा में है, किंतु विभाजित स्तर पर परिमाण के आकलन में उसका प्रदर्शन कमज़ोर है। एजेंसी ने पूर्वोत्तर में “सामान्य” मानसून की अपेक्षा की थी, जबकि वहाँ 1901 के बाद का सबसे शुष्क मौसम दर्ज हुआ, जिसमें 26 प्रतिशत की कमी रही। दक्षिणी प्रायद्वीप में 23 प्रतिशत कमी रही।

💡 Get AI-powered exam prep on your phone!

Download ExamYaari App

परिणाम अभी से दिख रहे हैं। कर्नाटक ने 100 से अधिक तालुकाओं में और महाराष्ट्र ने 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया है, यद्यपि राष्ट्रीय घाटा “कृषि सूखे” के केंद्र के 20 प्रतिशत के मानदंड से नीचे है। आईएमडी के अनुसार एल नीनो और प्रबल होगा तथा अक्तूबर से दिसंबर में देश के अधिकांश भाग में वर्षा सामान्य से कम रहेगी, जिससे मृदा-नमी और जलाशयों के पुनर्भरण को ख़तरा है।

पृष्ठभूमि एवं संदर्भ

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • मानसून 759 मिमी पर समाप्त हुआ, जो सामान्य 869 मिमी का 87 प्रतिशत है।
  • आईएमडी ने “सामान्य से कम” वर्षा (LPA का 90 से 95 प्रतिशत) का पूर्वानुमान दिया, जबकि उसके मॉडल “अपर्याप्त” वर्षा बता रहे थे।
  • जून में वर्षा सामान्य की 65 प्रतिशत रही, जबकि पूर्वानुमान 92 प्रतिशत का था, और अगस्त में 84 प्रतिशत।
  • पूर्वोत्तर में 1901 के बाद का सबसे शुष्क मानसून (26 प्रतिशत कम) और दक्षिणी प्रायद्वीप में 23 प्रतिशत कमी दर्ज हुई।
  • कर्नाटक ने 100 से अधिक तालुकाओं और महाराष्ट्र ने 358 में से 265 में सूखा घोषित किया है, और मंत्रिमंडल ने गेहूँ का MSP ₹25 तथा सरसों का ₹413 प्रति क्विंटल बढ़ाया।

एल नीनो और मानसून की समझ

एल नीनो एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की उष्ण अवस्था है। जब मध्य और पूर्वी प्रशांत गर्म होता है, तो वॉकर परिसंचरण कमज़ोर पड़ता है, भारतीय क्षेत्र पर अवतलन बढ़ता है और मानसूनी वर्षा घटने की प्रवृत्ति होती है। इसके प्रभाव को हिंद महासागरीय द्विध्रुव और मध्य-अक्षांशीय पश्चिमी विक्षोभ प्रभावित कर सकते हैं। संपादकीय के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ मानसून के महीनों में भारत में अधिक वर्षा ला रहे हैं, जबकि दक्षिण भारत एल नीनो-जनित अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील लगता है, जो पूर्वानुमान को जटिल बनाता है।

पूर्वानुमान क्षमता और संस्थागत मुद्दे

आईएमडी सांख्यिकीय और गतिकीय मॉडलों के मिश्रण का उपयोग करता है और सरकार ने 2024 में प्रेक्षण नेटवर्क, सुपरकंप्यूटिंग और उच्च-विभेदन पूर्वानुमान को उन्नत करने हेतु मिशन मौसम शुरू किया। आलोचना यह है कि राष्ट्रीय स्तर की सटीकता बड़ी क्षेत्रीय और मासिक त्रुटियों को ढक देती है। किसानों और राज्य सरकारों को उप-क्षेत्रीय, ज़िला-स्तरीय पूर्वानुमान चाहिए। एजेंसी के सामने संप्रेषण की चुनौती भी है: “सामान्य से कम” जैसी सतर्क श्रेणियाँ जोखिम को कम करके दिखा सकती हैं, जबकि “अपर्याप्तता” की स्पष्ट चेतावनी पहले तैयारी को प्रेरित करती।

कृषि एवं आर्थिक प्रभाव

जुलाई के आरंभ में खरीफ बुवाई पिछले वर्ष से 16 प्रतिशत पीछे थी, जो सितंबर के शुरू तक घटकर 2 प्रतिशत से कम रह गई। फिर भी अक्तूबर से दिसंबर में सामान्य से कम वर्षा रबी फसल के लिए ख़तरा है, जो मृदा-नमी और जलाशय भंडारण पर निर्भर है। गेहूँ और सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मंत्रिमंडल की वृद्धि का उद्देश्य विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और आय बनाए रखना है। कमज़ोर मानसून खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ा सकता है, ग्रामीण माँग पर दबाव डाल सकता है और मनरेगा जैसे कार्यों की माँग बढ़ा सकता है। कृषि-प्रधान राज्यों में ग्रामीण मज़दूरी और जीएसटी-आधारित उपभोग भी प्रभावित होते हैं।

आपदा प्रबंधन एवं विधिक ढाँचा

सूखे का प्रबंधन सूखा प्रबंधन नियमावली (2016) के अंतर्गत होता है, जिसके अनुसार राज्य वर्षा की कमी, शुष्क अवधि, वनस्पति सूचकांक और बुवाई के आँकड़ों के आधार पर सूखा घोषित करते हैं। राहत का वित्तपोषण आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से होता है। फसल क्षति प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से आच्छादित है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तैयारी का समन्वय करता है।

बिहार से संबंध

बिहार अत्यधिक रूप से खरीफ मौसम, विशेषकर धान, पर निर्भर है और प्रायः विरोधाभासी स्थितियों का सामना करता है: कोसी और गंडक जैसी हिमालयी नदियों से उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण में वर्षा की कमी। 2022 में वर्षा की कमी ने अनेक ज़िलों को प्रभावित किया और धान की रोपाई तथा सिंचाई की कमज़ोरियाँ उजागर कीं। बिहार की प्रतिक्रियाओं में जल-जीवन-हरियाली अभियान, राज्य नलकूप योजनाएँ और कृषि रोडमैप में फसल विविधीकरण पर ध्यान शामिल हैं। अक्तूबर से दिसंबर में प्रबल होता एल नीनो बिहार में गेहूँ और दलहन जैसी रबी फसलों को हानि पहुँचा सकता है, इसलिए ज़िला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएँ और बीज उपलब्धता महत्वपूर्ण हैं।

जलवायु परिवर्तन एवं तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य

जलवायु परिवर्तन परिवर्तनशीलता को और जटिल बनाता है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया भी एल नीनो-संबंधित सूखे का सामना करते हैं, और ऑस्ट्रेलिया का मौसम ब्यूरो संभाव्यता-आधारित श्रेणियों में मौसमी पूर्वानुमान जारी करता है। भारत संभाव्यता-आधारित और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान की ओर बढ़ सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को केवल श्रेणी नहीं, बल्कि कमी की संभावना बताए।

आगे की राह

भारत को मिशन मौसम के अंतर्गत सघन प्रेक्षण नेटवर्क का विस्तार करना और उच्च-विभेदन ज़िला-स्तरीय मॉडलों में निवेश करना चाहिए। आईएमडी को संभाव्यता-आधारित और प्रभाव-आधारित परामर्श जारी करने चाहिए। राज्यों को आकस्मिक योजनाएँ बनानी चाहिए, मोटे अनाज और दलहन जैसी सूखा-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देना चाहिए और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई को समर्थन देना चाहिए। पीएमएफबीवाई के दावों का शीघ्र निपटान होना चाहिए। जलाशय प्रबंधन गतिशील हो और रबी बुवाई के बारे में किसानों को पूर्व चेतावनी मिले।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

UPSC: GS-I (मानसून, जलवायु विज्ञान, एल नीनो), GS-III (कृषि, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण), निबंध (जलवायु और कृषि संकट)।
SSC: मानसून का आगमन, सामान्य वर्षा, आईएमडी का मुख्यालय, एल नीनो, MSP, पीएमएफबीवाई।
प्रमुख शब्द: एल नीनो, LPA, हिंद महासागरीय द्विध्रुव, पश्चिमी विक्षोभ, मिशन मौसम, सूखा प्रबंधन नियमावली 2016, SDRF/NDRF, पीएमएफबीवाई, MSP।

BPSC प्रासंगिकता

  • प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (सामान्य भूगोल, समसामयिकी); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र II (भारत का भूगोल)
  • पाठ्यक्रम विषय: भारतीय मानसून और जलवायु; कृषि और आपदा प्रबंधन
  • बिहार संदर्भ: उत्तर बिहार में बाढ़ के साथ दक्षिण बिहार में वर्षा की कमी; रबी गेहूँ और दलहन पर खतरा; जल-जीवन-हरियाली अभियान
  • संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: एल नीनो और IMD की वर्षा श्रेणियाँ; मुख्य: किसानों के लिए मानसून पूर्वानुमान में सुधार

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ

प्रश्न 1. एल नीनो का अर्थ है:
(a) मध्य और पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर का असामान्य रूप से ठंडा होना
(b) मध्य और पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर का असामान्य रूप से गर्म होना
(c) पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के बीच तापमान का अंतर
(d) उत्तर भारत पर पश्चिमी विक्षोभ

प्रश्न 2. IMD के अनुसार पूरे देश की मानसून वर्षा को “कम” (deficient) कब कहा जाता है?
(a) दीर्घावधि औसत (LPA) के 90% से कम होने पर
(b) LPA के 90% से 95% के बीच होने पर
(c) LPA के 96% से 104% के बीच होने पर
(d) LPA के 80% से कम होने पर

प्रश्न 3. 2024 में स्वीकृत “मिशन मौसम” का उद्देश्य है:
(a) मौसम से हुए नुकसान के लिए फ़सल बीमा देना
(b) भारत की मौसम और जलवायु निगरानी व पूर्वानुमान क्षमता को उन्नत करना
(c) सूखाग्रस्त ज़िलों में चेक डैम बनाना
(d) हर राज्य में क्लाउड-सीडिंग केंद्र स्थापित करना

उत्तर और व्याख्या देखें

प्रश्न 1: (b) एल नीनो, एल नीनो–दक्षिणी दोलन (ENSO) का गर्म चरण है और यह भारतीय मानसून को कमज़ोर करता है। हिंद महासागर के तापमान का अंतर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) कहलाता है।

प्रश्न 2: (a) IMD मौसमी वर्षा को LPA के 90% से कम होने पर “कम” कहता है। 90–95% “सामान्य से कम” और 96–104% “सामान्य” है।

प्रश्न 3: (b) मिशन मौसम IMD और अन्य संस्थाओं के लिए बेहतर निगरानी नेटवर्क, सुपरकंप्यूटिंग और उच्च-रिज़ॉल्यूशन पूर्वानुमान का वित्तपोषण करता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

बिहार में अक्सर एक ही मौसम में बाढ़ और सूखा दोनों आते हैं। इसके कारण बताइए और सुझाइए कि बेहतर पूर्वानुमान और योजना से किसानों का नुकसान कैसे कम किया जा सकता है। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *