जी20 में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और बहुपक्षवाद की बहस: डब्ल्यूटीओ परिदृश्यों के संकेत
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर से भेंट की और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के अंतर्गत अंतरिम समझौते के शीघ्र निष्कर्ष पर चर्चा की। उन्होंने यूरोपीय आयुक्त मारोश शेफ़चोविच से भी मुलाक़ात कर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और उसके लागू होने की दिशा में प्रगति की समीक्षा की। वर्तमान में जी20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है।
ये बैठकें उस पृष्ठभूमि में हो रही हैं जिसमें वाशिंगटन द्वारा भारत पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत शुल्क की संभावना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि “सभी व्यापारिक मुद्दों” पर चर्चा होगी। इस प्रकार भारत दोहरी रणनीति पर चल रहा है: अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ बाज़ार पहुँच सुरक्षित करना तथा नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली की रक्षा करना।
उसी दिन वित्त मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा ने चेताया कि बहुपक्षीय व्यवस्था का स्थान लेने वाले द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समझौते “अधिक व्यापार-विचलन, ऊँची व्यापार लागत और अधिक अनिश्चितता” उत्पन्न कर सकते हैं। विश्व व्यापार संगठन की विश्व व्यापार रिपोर्ट 2026 का हवाला देते हुए उसने 2050 के लिए तीन परिदृश्य रखे। अभ्यर्थियों के लिए यह व्यापार कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और भारत की आर्थिक सुरक्षा से जोड़ने वाला विषय है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- श्री गोयल ने मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में USTR ग्रीयर के साथ भारत-अमेरिका BTA के अंतरिम समझौते पर चर्चा की।
- अमेरिका भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है, जिसे वाणिज्य सचिव ने चर्चा के मुद्दों में शामिल बताया।
- श्री गोयल ने आयुक्त शेफ़चोविच के साथ भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की प्रगति की भी समीक्षा की।
- डब्ल्यूटीओ रिपोर्ट के अनुसार भू-खंडित विश्व में 2050 तक वैश्विक जीडीपी 5.1 प्रतिशत और केवल-FTA विश्व में 6.9 प्रतिशत घट सकता है।
- संवर्धित सहयोग परिदृश्य में 2050 तक वैश्विक जीडीपी 2.9 प्रतिशत और निर्यात 17.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
भारत के व्यापार दृष्टिकोण का विकास
भारत 1947 में GATT का संस्थापक सदस्य था और 1995 में विश्व व्यापार संगठन से जुड़ा। उसका ऐतिहासिक रुख विकासात्मक लचीलेपन, खाद्य सुरक्षा हेतु सार्वजनिक भंडारण और विशेष एवं विभेदक व्यवहार पर केंद्रित रहा है। 2010 के बाद भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (2022), ऑस्ट्रेलिया (2022) और EFTA (2024) जैसे अनेक द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समझौते किए, जबकि 2019 में RCEP से बाहर रहा। अमेरिका और यूरोपीय संघ से वर्तमान वार्ताएँ गहरे और व्यापक समझौतों की ओर झुकाव दर्शाती हैं।
डब्ल्यूटीओ परिदृश्य और वित्त मंत्रालय की चेतावनी
“भू-खंडित” परिदृश्य में व्यापार भू-राजनीतिक गुटों के आसपास संगठित होता है और 2050 के आधार-रेखा की तुलना में वैश्विक निर्यात 18.6 प्रतिशत घटता है। “FTA विश्व” में तरजीही समझौतों का जाल ग़ैर-भागीदारों पर शुल्क लगाता है और निर्यात 26.9 प्रतिशत गिरता है। “संवर्धित सहयोग” में निर्यात 17.9 प्रतिशत बढ़ता है। निष्कर्ष यह है कि FTA तभी डब्ल्यूटीओ के पूरक बनते हैं जब वे उसके ढाँचे के भीतर काम करें। भारत के लिए ऊँचे शुल्क वाला अमेरिकी बाज़ार और डब्ल्यूटीओ की निष्क्रिय अपीलीय संस्था, दोनों ने पूर्वानुमेयता कमज़ोर की है।
रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक आयाम
भारत संबंधों में संतुलन साध रहा है। अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, किंतु शुल्क की धमकियों और रूसी तेल पर विवादों ने संबंधों में तनाव उत्पन्न किया है। यूरोपीय संघ विविध बाज़ार और प्रौद्योगिकी देता है, पर कार्बन (कार्बन सीमा समायोजन तंत्र), श्रम और संधारणीयता संबंधी शर्तें भी लाता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ऊर्जा-मूल्य का जोखिम बढ़ाता है। घरेलू राजनीति भी महत्वपूर्ण है: कृषि, डेयरी और डेटा स्थानीयकरण संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहाँ रियायतें राजनीतिक रूप से महँगी हो सकती हैं।
विधिक एवं संस्थागत ढाँचा
संधि-निर्माण अनुच्छेद 73 के अंतर्गत कार्यपालिका की शक्ति है और संसद की भूमिका सीमित है, यद्यपि अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय समझौतों के क्रियान्वयन हेतु विधि-निर्माण की अनुमति देता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय, वाणिज्य विभाग और विदेश व्यापार नीति 2023 घरेलू ढाँचा प्रदान करते हैं। विश्लेषक लंबे समय से व्यापार समझौतों की संसदीय जाँच की माँग करते रहे हैं, क्योंकि आजीविकाओं पर उनका प्रभाव बड़ा होता है।
बिहार से संबंध
बिहार का निर्यात आधार छोटा है, फिर भी उत्पाद-विशिष्ट अवसर मौजूद हैं: मखाना, लीची, भागलपुरी रेशम, कतरनी चावल, ज़र्दालू आम और चमड़ा उत्पाद, जिनमें कई को भौगोलिक संकेतक (GI) प्राप्त है। मखाने की बढ़ती वैश्विक माँग को केंद्रीय बजट 2025-26 में मखाना बोर्ड की घोषणा द्वारा मान्यता मिली है। शुल्क बाधाएँ, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता मानक और शीत-शृंखला की कमी अमेरिका और यूरोपीय संघ तक पहुँच में अवरोध हैं। प्रसंस्कृत खाद्य और हस्तशिल्प पर शुल्क घटाने या GI उत्पादों को मान्यता देने वाला कोई भी अंतरिम समझौता सीधे बिहार के किसानों और कारीगरों को लाभ देगा, और राज्य को एक ज़िला-एक उत्पाद कार्यक्रम के तहत निर्यात समूह विकसित करने चाहिए।
चुनौतियाँ
चुनौतियों में अमेरिका के साथ वार्ता-शक्ति की असमानता, कार्बन कर जैसी ग़ैर-शुल्क बाधाओं का जोखिम, छोटे किसानों की सुरक्षा और रियायतों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था का प्रबंधन शामिल हैं। समानांतर वार्ताएँ सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र जैसे दबाव भी उत्पन्न कर सकती हैं, जहाँ एक साझेदार को दी गई रियायत दूसरे भी माँगने लगते हैं।
आगे की राह
भारत को डब्ल्यूटीओ-संगत और नियम-आधारित समझौते करने चाहिए। उसे व्यापार-वार्ता क्षमता में निवेश करना और प्रभाव-आकलन प्रकाशित करना चाहिए। निर्यात अवसंरचना, गुणवत्ता प्रमाणन और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना आवश्यक है। भारत को डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान प्रणाली के सुधार का नेतृत्व करना और जी20 में विकासशील देशों के हितों की पैरवी करनी चाहिए। अंततः बाज़ारों का विविधीकरण किसी एक देश के शुल्क-निर्णयों के प्रति जोखिम घटाता है।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
UPSC: GS-II (द्विपक्षीय समूह, विकसित देशों की नीतियों का भारत पर प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ), GS-III (बाह्य क्षेत्र, व्यापार)।
SSC: डब्ल्यूटीओ का मुख्यालय और स्थापना वर्ष, जी20, BTA, FTA, GI टैग, मेक इन इंडिया।
प्रमुख शब्द: BTA, अंतरिम समझौता, डब्ल्यूटीओ विश्व व्यापार रिपोर्ट 2026, व्यापार-विचलन, RCEP, CBAM, अनुच्छेद 253, USTR, जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक।
BPSC प्रासंगिकता
- प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समसामयिकी); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र I (समसामयिक घटनाएँ) और पत्र II (भारतीय अर्थव्यवस्था)
- पाठ्यक्रम विषय: भारत की व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय संगठन
- बिहार संदर्भ: मखाना, शाही लीची, भागलपुरी सिल्क, कतरनी चावल और ज़रदालू आम जैसे GI-टैग उत्पाद, और “एक ज़िला एक उत्पाद” क्लस्टर
- संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: भारत के व्यापार समझौते और WTO; मुख्य: द्विपक्षीय सौदे बनाम बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1. भारत ने 2019 में निम्नलिखित में से किस क्षेत्रीय व्यापार समझौते में शामिल न होने का निर्णय लिया?
(a) CPTPP
(b) RCEP
(c) SAFTA
(d) BIMSTEC FTA
प्रश्न 2. निम्नलिखित समझौतों और उन पर भारत के हस्ताक्षर के वर्षों पर विचार कीजिए:
1. भारत–UAE CEPA – 2022
2. भारत–ऑस्ट्रेलिया ECTA – 2022
3. भारत–EFTA TEPA – 2024
उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
प्रश्न 3. विश्व व्यापार संगठन (WTO) कब अस्तित्व में आया?
(a) 1947
(b) 1986
(c) 1995
(d) 2001
उत्तर और व्याख्या देखें
प्रश्न 1: (b) भारत नवंबर 2019 में व्यापार घाटे और कृषि व डेयरी क्षेत्रों की चिंताओं के कारण क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) से अलग हो गया।
प्रश्न 2: (d) तीनों सही हैं। UAE CEPA और ऑस्ट्रेलिया ECTA 2022 में, और EFTA समूह (स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन) के साथ TEPA मार्च 2024 में हुआ।
प्रश्न 3: (c) WTO ने 1 जनवरी 1995 को GATT की जगह ली। इसका मुख्यालय जिनेवा में है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
क्या द्विपक्षीय व्यापार समझौते बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मज़बूत करते हैं या कमज़ोर? अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत की वर्तमान वार्ताओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)