सितंबर 2026 में जीएसटी संग्रह ₹2.03 लाख करोड़: आयात-आधारित हिस्से में वृद्धि का अर्थ
सितंबर 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) राजस्व बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14.7 प्रतिशत की वृद्धि है। अप्रैल से सितंबर की अवधि में संचयी संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़ा। ऊपरी तौर पर यह केंद्र और राज्यों, दोनों के लिए शुभ संकेत है, और यह उस स्थिति में हुआ है जब सितंबर 2025 के दर-युक्तिकरण से अनेक वस्तुओं पर कर घटा था। शुद्ध जीएसटी संग्रह इससे भी तेज़, 18.1 प्रतिशत, बढ़ा, जिसे डेलॉयट के विश्लेषकों ने पिछले वर्ष की ऊँची दरों के संदर्भ में उल्लेखनीय बताया।
किंतु आँकड़ों के भीतर एक संरचनात्मक परिवर्तन छिपा है। आयात पर एकत्रित जीएसटी का हिस्सा 32.2 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जबकि घरेलू हिस्सा 67.8 प्रतिशत के निम्नतम स्तर पर आ गया। आयात-संबंधी जीएसटी में 25.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू लेनदेन में केवल 10.1 प्रतिशत की। राजकोषीय संघवाद, व्यापार और समष्टि-आर्थिक प्रबंधन के अध्ययन के लिए इसका महत्व समझना आवश्यक है।
मूल प्रश्न यह है कि मज़बूत जीएसटी आँकड़े घरेलू माँग की सुदृढ़ता दर्शाते हैं या वे आंशिक रूप से मुद्रा-अवमूल्यन, कमोडिटी कीमतों और आयात-गतिकी का परिणाम हैं। ग्रांट थॉर्नटन के मनोज मिश्र ने इसी संयोजन की ओर संकेत किया। विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) सितंबर में सात माह के उच्च स्तर 55.1 पर रहा, पर दूसरी तिमाही का औसत 53.8 रहा, जो 2021 के बाद सबसे कम है। अतः तस्वीर मिश्रित है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- सितंबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह ₹2.03 लाख करोड़ रहा, जो वार्षिक आधार पर 14.7 प्रतिशत अधिक है।
- आयात-संबंधी राजस्व में 25.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू जीएसटी में 10.1 प्रतिशत की।
- आयात का हिस्सा रिकॉर्ड 32.2 प्रतिशत और घरेलू हिस्सा रिकॉर्ड निम्न 67.8 प्रतिशत रहा।
- कुल रिफंड में 3 प्रतिशत की कमी आई, जिसका कारण घरेलू रिफंड में गिरावट रही।
- अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में सकल जीएसटी 11.6 प्रतिशत बढ़ा।
विधायी एवं संस्थागत पृष्ठभूमि
जीएसटी को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा लागू किया गया, जिसने अनुच्छेद 246A (वस्तु एवं सेवा पर कर लगाने की समवर्ती शक्ति), अनुच्छेद 269A (अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर कर) और अनुच्छेद 279A (जीएसटी परिषद) जोड़े। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद भारित मतों के तीन-चौथाई बहुमत से दरें तय करती है, जिसमें केंद्र के पास एक-तिहाई मत होते हैं। सितंबर 2025 के सुधार ने ढाँचे को मुख्यतः 5 और 18 प्रतिशत की दो दरों में बदल दिया तथा अहितकर और विलासिता वस्तुओं के लिए उच्च दर रखी। राज्यों के लिए क्षतिपूर्ति उपकर की अवधि समाप्त होने से अब कर-आधार की उत्प्लावकता (buoyancy) पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
आँकड़ों का विश्लेषण: घरेलू बनाम आयात जीएसटी
आयात पर जीएसटी, मुख्यतः IGST, आयात के मूल्य पर निर्भर करता है। जब रुपया कमज़ोर होता है और कच्चे तेल जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, तब आयात मूल्य और सीमा पर वसूला गया कर बढ़ता है। पश्चिम एशिया संघर्ष, जिसने यूरोपीय संघ में डीज़ल को रिकॉर्ड €2.24 प्रति लीटर तक पहुँचाया, ऐसा ही एक कारक है। घरेलू जीएसटी भारत के भीतर उपभोग और उत्पादन को दर्शाता है। इसलिए आयात जीएसटी की तीव्र वृद्धि माँग के बजाय कीमतों के प्रभाव का संकेत हो सकती है। साथ ही आयात पर चुकाए गए कर का इनपुट क्रेडिट बाद में दावा किया जाता है, इसलिए सरकार को शुद्ध लाभ सकल आँकड़े से कम होता है।
आर्थिक निहितार्थ
आयात-हिस्से के बढ़ने के तीन निहितार्थ हैं। पहला, राजस्व बाह्य आघातों और विनिमय दर के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। दूसरा, यह घरेलू मूल्य-संवर्धन में मंदी को ढक सकता है। तीसरा, यह केंद्र-राज्य साझेदारी सूत्र को जटिल बनाता है, क्योंकि आयात पर IGST केंद्र और राज्यों में विभाजित होता है, जबकि राज्य जीएसटी घरेलू उपभोग पर टिका होता है। रिफंड में 3 प्रतिशत की कमी कड़े प्रशासन और अधिक लेखा-परीक्षा का संकेत है। डेलॉयट के एम.एस. मणि ने वृद्धि का श्रेय आंशिक रूप से जटिलताओं में कमी और अधिक जीएसटी ऑडिट को दिया।
शासन एवं अनुपालन संबंधी मुद्दे
ई-इनवॉइसिंग, ई-वे बिल, डेटा विश्लेषण और आधार-आधारित पंजीकरण सत्यापन जैसे उपायों ने अनुपालन सुधारा है। फिर भी इनपुट टैक्स क्रेडिट पर मुकदमेबाज़ी, जीएसटी अपीलीय अधिकरणों की स्थापना में विलंब और छोटे व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ जैसी चिंताएँ बनी हुई हैं। भारत संघ बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि परिषद की सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, प्रेरक हैं। यह सहकारी संघवाद को मज़बूत करता है, पर विवादों को भी जन्म देता है।
संघीय आयाम और बिहार
बिहार एक उपभोक्ता राज्य है जिसका विनिर्माण आधार सीमित है, इसलिए जनसंख्या के अनुपात में उसका अपना जीएसटी राजस्व कम है। वह विभाज्य पूल से हस्तांतरण पर बहुत निर्भर है, जिसमें निम्न प्रति व्यक्ति आय के कारण उसे ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़े हिस्सों में से एक मिलता रहा है। आयात-प्रेरित जीएसटी वृद्धि का लाभ राज्यों को केवल उसी सीमा तक मिलता है जहाँ तक IGST का बँटवारा होता है। बिहार का लाभ उसके बाज़ारों में गंतव्य-आधारित उपभोग वृद्धि पर निर्भर करता है, जो ग्रामीण आय, प्रेषित धन और कृषि दशाओं से जुड़ी है। इस वर्ष जैसा कमज़ोर मानसून इसे बाधित कर सकता है। जब जीएसटी की उत्प्लावकता स्थानीय गतिविधि के बजाय आयात पर टिकी हो, तब बिहार की विशेष दर्जे और वित्त आयोग से अधिक हस्तांतरण की पुरानी माँग को बल मिलता है।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य
वैश्विक वैट प्रणालियों में भी मुद्रा के गिरने पर आयात-प्रधान राजस्व दिखता है। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ सीमा शुल्क पर आयात वैट वसूलते हैं। भारत की चुनौती विशिष्ट है, क्योंकि यहाँ साझा कर-आधार वाली संघीय संरचना है, जिसमें हर संरचनात्मक परिवर्तन राज्यों के वित्त को प्रभावित करता है।
आगे की राह
भारत को पेट्रोलियम और बिजली को चरणबद्ध तथा राजस्व-तटस्थ ढंग से जीएसटी के दायरे में लाकर आधार का विस्तार करना चाहिए। अपीलीय अधिकरणों को पूर्ण रूप से कार्यशील बनाकर विवादों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करना चाहिए। परिषद पारदर्शिता के लिए राज्यवार घरेलू और IGST आँकड़े प्रकाशित कर सकती है। नीति-निर्माताओं को उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर तथा विवेकपूर्ण बाह्य-क्षेत्र प्रबंधन से रुपये को स्थिर रखकर आयात-मूल्यों पर निर्भरता घटानी चाहिए।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
UPSC: GS-III (सार्वजनिक वित्त, कराधान, समावेशी विकास), GS-II (संघवाद, राजकोषीय संबंध, वित्त आयोग)।
SSC: जीएसटी संरचना, अनुच्छेद 246A, 279A, 101वाँ संशोधन, जीएसटी परिषद की संरचना, IGST, CGST, SGST।
प्रमुख शब्द: IGST, इनपुट टैक्स क्रेडिट, जीएसटी परिषद, 101वाँ संशोधन, क्षतिपूर्ति उपकर, मोहित मिनरल्स मामला, PMI, कर उत्प्लावकता।
BPSC प्रासंगिकता
- प्रश्नपत्र: प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन (भारतीय अर्थव्यवस्था); मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन पत्र II (भारतीय अर्थव्यवस्था)
- पाठ्यक्रम विषय: लोक वित्त, अप्रत्यक्ष कर और केंद्र–राज्य वित्तीय संबंध
- बिहार संदर्भ: बिहार उत्पादन से कहीं अधिक उपभोग करता है, इसलिए उसका GST राजस्व गंतव्य-आधारित उपभोग और IGST व केंद्रीय हस्तांतरण में हिस्से पर निर्भर है
- संभावित प्रश्न प्रकार: प्रारंभिक: IGST और GST के संवैधानिक प्रावधान; मुख्य: कर उत्प्लावकता और राज्यों पर उसका असर
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा के लिए MCQ
प्रश्न 1. संविधान का कौन-सा अनुच्छेद अंतरराज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होने वाली आपूर्ति पर GST (IGST) लगाने और वसूलने का प्रावधान करता है?
(a) अनुच्छेद 246A
(b) अनुच्छेद 269A
(c) अनुच्छेद 270
(d) अनुच्छेद 279A
प्रश्न 2. भारत संघ बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में सर्वोच्च न्यायालय ने GST परिषद की सिफ़ारिशों को क्या माना?
(a) संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों पर बाध्यकारी
(b) केवल संघ पर बाध्यकारी
(c) प्रेरक, बाध्यकारी नहीं
(d) राष्ट्रपति की स्वीकृति के अधीन
प्रश्न 3. भारत में आयात पर GST किस रूप में वसूला जाता है?
(a) केवल CGST
(b) केवल SGST
(c) IGST (सीमा शुल्क के साथ)
(d) केवल क्षतिपूर्ति उपकर
उत्तर और व्याख्या देखें
प्रश्न 1: (b) अनुच्छेद 269A अंतरराज्यीय आपूर्ति और आयात से संबंधित है। केंद्र IGST लगाता है और इसे संघ व राज्यों में बाँटा जाता है।
प्रश्न 2: (c) न्यायालय ने कहा कि सिफ़ारिशों का प्रेरक महत्व है, जो सहकारी संघवाद को दर्शाता है। संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्ति बनी रहती है।
प्रश्न 3: (c) आयात को अंतरराज्यीय आपूर्ति माना जाता है, इसलिए सीमा पर मूल सीमा शुल्क के साथ IGST लगता है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
आयात से जुड़े GST का बढ़ता हिस्सा कुल राजस्व को घरेलू माँग से ज़्यादा मज़बूत दिखा सकता है। ऐसा क्यों होता है, समझाइए, और बिहार जैसे उपभोग-प्रधान राज्य के वित्त पर इसके अर्थ की चर्चा कीजिए। (लगभग 250 शब्दों में उत्तर दें।)