भारत द्वारा विद्युत क्षेत्र खरीद में चीन-संबद्ध कंपनियों पर प्रतिबंधों में ढील: नीतिगत बदलाव और निहितार्थ

2020 के पश्चात चीनी निवेश के प्रति अपने रुख से एक उल्लेखनीय बदलाव करते हुए, भारत सरकार ने चीनी स्वामित्व अथवा तकनीकी संबंध रखने वाली चार कंपनियों को सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र परियोजनाओं के लिए बोली लगाने की अनुमति देने का आदेश जारी किया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की क्रय नीति प्रभाग द्वारा 24 जून 2026 को जारी इस आदेश के तहत TBEA एनर्जी इंडिया, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) को दो वर्षों की छूट प्रदान की गई है, जिसके तहत उन्हें सार्वजनिक परियोजनाओं में बोली लगाने से पूर्व भारत सरकार के साथ पंजीकरण कराने की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया गया है — यह पंजीकरण पहले भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए अनिवार्य था।

यह निर्णय जनवरी 2026 में विद्युत मंत्रालय के अनुरोध तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत सचिवों की समिति और पंजीकरण समिति द्वारा अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के पश्चात लिया गया है। उल्लेखनीय है कि आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस छूट को “एक मिसाल के रूप में नहीं माना जाना चाहिए”, जो यह संकेत देता है कि सरकार इसे एक व्यापक नीतिगत उलटफेर के बजाय एक नियंत्रित, क्षेत्र-विशिष्ट राहत के रूप में प्रबंधित करना चाहती है।

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यह घटनाक्रम UPSC मुख्य परीक्षा के GS-III (भारतीय अर्थव्यवस्था, अवसंरचना) और GS-II (सरकारी नीतियाँ, भारत के पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संबंध) दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

2020 की गलवान घाटी झड़प के पश्चात, भारत ने “प्रेस नोट 3” के माध्यम से अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में संशोधन किया था, जिसके तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों — मुख्यतः चीन — से आने वाले निवेश के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई थी, ताकि कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट में फंसी भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोका जा सके।

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 24 जून 2026 के आदेश के माध्यम से चार चीन-संबद्ध कंपनियों को सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र परियोजनाओं में बोली हेतु अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण आवश्यकताओं से दो वर्षों की छूट प्रदान की।
  • चार लाभार्थी कंपनियाँ हैं: TBEA एनर्जी इंडिया (TBEA समूह की सहायक कंपनी), नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया, तथा ताइकाई इलेक्ट्रिक इंडिया (ताइकाई समूह की सहायक कंपनी)।
  • यह राहत जनवरी 2026 में विद्युत मंत्रालय के अनुरोध तथा सचिवों की समिति एवं DPIIT-नीत पंजीकरण समिति के अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के पश्चात दी गई है।
  • यह मई 2026 की पूर्व अधिसूचना पर आधारित है, जिसमें 10% तक चीनी शेयरधारिता वाली विदेशी कंपनियों को स्वचालित मार्ग से भारत में निवेश की अनुमति दी गई थी, जो 2020 के “प्रेस नोट 3” में आंशिक छूट थी।
  • आदेश स्पष्ट रूप से इसे मिसाल न मानने की बात कहता है, जो एक संरचनात्मक के बजाय नियंत्रित नीतिगत परिवर्तन को दर्शाता है।

ऐतिहासिक एवं नीतिगत पृष्ठभूमि

“प्रेस नोट 3” (2020) भारत के हाल के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण FDI नीतिगत हस्तक्षेपों में से एक था, जिसने पड़ोसी देशों के लिए स्वचालित मार्ग निवेश व्यवस्था को मौलिक रूप से बदल दिया। यद्यपि इसका उद्देश्य महामारी-काल में संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण से सुरक्षा प्रदान करना था, किंतु इसका उन क्षेत्रों पर स्थायी प्रभाव पड़ा जहाँ चीनी उपकरण और पूंजी की आवश्यकता होती है, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार और विद्युत पारेषण में।

आर्थिक निहितार्थ एवं आँकड़े

भारत के विद्युत क्षेत्र के आधुनिकीकरण — ग्रिड उन्नयन, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, और EV चार्जिंग अवसंरचना सहित — के लिए ऐसे उपकरणों की आवश्यकता होती है जो अक्सर चीन में प्रतिस्पर्धी रूप से निर्मित होते हैं। सार्वजनिक निविदाओं से चीन-संबद्ध कंपनियों को प्रतिबंधित करने से कुछ खंडों में परियोजना समयसीमा और लागत प्रभावित हुई है। कांग्रेस विपक्ष ने बताया कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार “रिकॉर्ड स्तर” तक पहुँच रहा है।

शासन एवं संस्थागत आयाम

निर्णय-निर्माण श्रृंखला — विद्युत मंत्रालय का अनुरोध, सचिवों की समिति की समीक्षा, DPIIT पंजीकरण समिति की मंजूरी, और वित्त मंत्रालय का आदेश — संवेदनशील आर्थिक निर्णयों के लिए भारत की स्तरित अंतर-मंत्रालयी अनुमोदन संरचना को दर्शाती है। आलोचकों का तर्क है कि इसमें पारदर्शिता का अभाव है, क्योंकि ऐसे आदेश सामान्यतः सक्रिय रूप से प्रचारित नहीं किए जाते।

भू-राजनीतिक आयाम

यह राहत भारत-चीन आर्थिक संबंधों में “निरंतर पिघलाव” के व्यापक संकेतों के साथ मेल खाती है, जबकि जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की यात्रा के दौरान अनावरण की गई भारत-जापान आर्थिक साझेदारी रूपरेखा पर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी सामने आई, जिसमें बीजिंग ने कहा कि “देशों के बीच सहयोग को किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करना चाहिए।” यह प्रतिच्छेदन — घरेलू स्तर पर चीन-संबद्ध निवेश को सुगम बनाना, साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों पर जापान के साथ रणनीतिक साझेदारी में विविधता लाना — आर्थिक कूटनीति में भारत के विशिष्ट बहु-संरेखण दृष्टिकोण को दर्शाता है।

राजनीतिक एवं विपक्षी प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को चीन के प्रति “नियोजित समर्पण” करार दिया है, इसे भारत के बढ़ते व्यापार घाटे तथा अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख में अनसुलझे सीमा तनावों से जोड़ते हुए।

बिहार संबंध

बिहार का अपना विद्युत अवसंरचना आधुनिकीकरण — जिसमें पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के अंतर्गत ग्रिड सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण विद्युतीकरण शामिल है — लागत-प्रतिस्पर्धी उपकरण खरीद पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करता है। यदि चीन-संबद्ध कंपनियाँ व्यापक सार्वजनिक निविदा तंत्र में पुनः प्रवेश करती हैं, तो बिहार की राज्य विद्युत उपयोगिताएँ (जैसे NBPDCL और SBPDCL) पारेषण एवं वितरण उन्नयन हेतु सस्ते उपकरणों तक पहुँच प्राप्त कर सकती हैं, हालाँकि इसे रणनीतिक स्रोत जोखिमों के साथ तौला जाना चाहिए।

आगे की राह

भारत को विवेकाधीन, मामला-दर-मामला छूट के बजाय एक पारदर्शी, प्रकाशित मानदंड-आधारित ढाँचे की आवश्यकता है, जो स्पष्ट रूप से यह रेखांकित करे कि किन प्रौद्योगिकी खंडों में छूट उपयुक्त है और कौन-से सुरक्षा-संवेदनशील बने रहेंगे। साथ ही, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के अंतर्गत विद्युत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण में निरंतर निवेश से चीनी आपूर्तिकर्ताओं पर संरचनात्मक निर्भरता कम होनी चाहिए।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

GS-II: चीन के साथ भारत के द्विपक्षीय आर्थिक संबंध, सरकारी नीति निर्माण। GS-III: FDI नीति, प्रेस नोट 3, अवसंरचना वित्तपोषण, विद्युत क्षेत्र सुधार। मुख्य शब्दावली: प्रेस नोट 3 (2020), DPIIT, सचिवों की समिति, स्वचालित मार्ग FDI, क्रय नीति प्रभाग।

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