27 जून 2026 को ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग को नियंत्रित करने के अपने संप्रभु अधिकार को पुन: मुखर किया। हॉर्मुज जलडमरूमध्य — जो लगभग 33 किमी चौड़ा है — वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत और वैश्विक LNG आपूर्ति का लगभग 25 प्रतिशत पारगमन करता है। ईरान की यह माँग कि वह और ओमान संयुक्त रूप से जलडमरूमध्य का प्रबंधन करें, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के स्थापित सिद्धांत — नौवहन की स्वतंत्रता — को सीधे चुनौती देती है।
GCC देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान की शुल्क-लगाने की माँग को अस्वीकार किया और ‘स्वतंत्र, बिना शर्त और अप्रतिबंधित नौवहन’ की माँग की। UPSC की दृष्टि से यह GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) और GS-III (ऊर्जा सुरक्षा) के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
पृष्ठभूमि: हॉर्मुज — विश्व का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गला
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 33 किमी चौड़ा है और इसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल पारगमन करता है।
- UNCLOS (1982) के भाग-III के अंतर्गत सभी जहाजों को अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्यों में ‘पारगमन मार्ग’ का अप्रतिबंधित अधिकार है।
- ईरान ने 1980-88 के तेल टैंकर युद्ध, 2011-12 के परमाणु प्रतिबंध काल और 2019 में बार-बार जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी है।
- IMO महासचिव ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 500 जहाज फँसे हुए हैं।
- भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर अतुलनीय प्रभाव देती है। जलडमरूमध्य आंशिक रूप से ईरान के क्षेत्रीय जल में स्थित है। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान ‘टैंकर युद्ध’ हुआ। 2011-12 में ईरान ने परमाणु प्रतिबंधों के जवाब में जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी।
अंतर्राष्ट्रीय विधि और UNCLOS ढाँचा
UNCLOS अनुच्छेद 44 स्पष्ट रूप से तटीय राज्यों को पारगमन मार्ग को ‘बाधित’ करने से रोकता है। ईरान की शुल्क-लगाने की माँग इसका उल्लंघन करती है। ईरान का तर्क है कि जलडमरूमध्य को ‘अंतरिम समझौते की शर्तों के अनुसार ईरान और ओमान द्वारा शासित किया जाना चाहिए’।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक निहितार्थ
हॉर्मुज बाधाओं के प्रति भारत की भेद्यता गंभीर है। भारत अपना लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आयात करता है। RBI ने FY 2025-26 में रुपये को सहारा देने के लिए 53 बिलियन डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा बाजार में बेची। यदि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं तो भारत का व्यापार घाटा बढ़ेगा।
भारत की राजनयिक स्थिति
ईरान-अमेरिका-GCC गतिशीलता के प्रति भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की विशेषता रखती है। चाबहार बंदरगाह परियोजना और अफगानिस्तान एवं मध्य एशिया तक संपर्क में ईरानी सहयोग भारत-ईरान संबंधों की रणनीतिक गहराई को दर्शाता है।
बिहार से संबंध
बिहार की बड़ी कामकाजी-आयु जनसंख्या खाड़ी देशों में श्रम प्रवासन में भाग लेती है; सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और सारण जैसे जिलों में प्रेषण पारिवारिक आय का प्रमुख स्रोत है। बिहार का कृषि क्षेत्र उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भर है और भारत में यूरिया उत्पादन आयातित LNG पर निर्भर करता है।
आगे की राह
हॉर्मुज संकट के स्थायी समाधान के लिए बहुपक्षीय राजनयिक जुड़ाव आवश्यक है। भारत को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करना चाहिए और अफ्रीकी, अमेरिकी और रूसी आपूर्तिकर्ताओं की ओर तेल आयात स्रोतों में विविधता लानी चाहिए।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
GS-II: भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा कूटनीति, समुद्री कानून (UNCLOS), रणनीतिक स्वायत्तता। GS-III: भारत की ऊर्जा निर्भरता, तेल कीमत का रुपये पर प्रभाव, चालू खाता घाटा। स्मरणीय शब्द: UNCLOS, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, पारगमन मार्ग, GCC, चाबहार बंदरगाह, IMO, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार।