पश्चिमी हिंद महासागर में रणनीतिक सुदृढ़ीकरण: भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय परिणामों का रणनीतिक आव्यूह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स की आधिकारिक यात्रा पश्चिमी हिंद महासागर (WIO) में भारत की समुद्री कूटनीति और रणनीतिक सुदृढ़ीकरण के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. बढ़ते भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा, जलवायु परिवर्तन के खतरों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की असुरक्षा के इस दौर में, विक्टोरिया में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ताएं यह स्पष्ट करती हैं कि भारत इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक दृष्टि को व्यावहारिक साझेदारी में बदलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और डिजिटल भुगतान जैसे विविध क्षेत्रों में फैले 19 द्विपक्षीय समझौतों (Outcomes) की घोषणा करके भारत ने इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ (Net Security Provider) के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है.

सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए, इस द्विपक्षीय ढांचे का अध्ययन भारत के ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) सिद्धांत और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को समझने के लिए आवश्यक है. सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के साथ साझेदारी अब भारतीय विदेश नीति का कोई गौण हिस्सा नहीं है, बल्कि यह बहुपक्षीय रणनीति, नौसैनिक संतुलन और मजबूत आर्थिक नेटवर्क के निर्माण का मुख्य मंच बन चुका है.

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यह लेख भारत-सेशेल्स रणनीतिक संबंधों का एक व्यापक भू-राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो यूपीएससी (UPSC) और एसएससी (SSC) दोनों परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी है.

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह ऐतिहासिक विमर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस द्वीपीय राष्ट्र की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान संपन्न हुआ, जहाँ उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बैठक की और वहां की नेशनल असेंबली (संसद) को भी संबोधित किया. यह यात्रा सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर हुई, जो दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को प्रदर्शित करती है. इस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को एक “साझा घर” मानते हुए इसकी सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझा जिम्मेदारियों का निर्वहन करना था.

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • भारत और सेशेल्स ने आधिकारिक तौर पर 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत सहयोग का दायरा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डिजिटल भुगतान और स्वास्थ्य जैसे उन्नत क्षेत्रों तक बढ़ाया गया है.
  • समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने सेशेल्स रक्षा बल (SDF) को एक तीव्र गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel), पांच लेजर रेडियल क्लास नावें और 10 उपयोगिता वाहन उपहार में दिए.
  • भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने सेशेल्स के तटरक्षक जहाज ‘पीएस जोरोएस्टर’ का अत्याधुनिक तकनीकी जीर्णोद्धार (Refit) पूरा किया और उनके डोर्नियर विमान को ‘ग्लास कॉकपिट’ से अपग्रेड किया.
  • ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को बढ़ावा देने और हरित नेतृत्व के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता के लिए सेशेल्स के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें “गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन” सम्मान से नवाजा गया.
  • सेशेल्स के इस 50वें राष्ट्रीय दिवस के ऐतिहासिक सैन्य परेड में असम रेजीमेंट के 32 सैन्य कर्मियों से बने एक भारतीय सेना के मार्चिंग दस्ते ने मुख्य रूप से भाग लिया.

19 द्विपक्षीय समझौतों (Outcomes) की संरचना

इस शिखर सम्मेलन के दौरान तय किए गए 19 परिणाम दोनों देशों की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमताओं को एक साथ जोड़ने के लिए एक बहु-स्तरीय कार्यात्मक ढांचा तैयार करते हैं:

  • डिजिटल बुनियादी ढांचे का एकीकरण: सेशेल्स में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू करने के समझौते से पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन की लागत कम होगी.
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग: बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए हस्ताक्षरित औपचारिक समझौता सेशेल्स को अपने विशाल अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी के लिए भारत से रीयल-टाइम डेटा, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा.
  • वित्तीय सहायता और क्रेडिट लाइन्स: भारतीय आयात-निर्यात बैंक (EXIM Bank) के साथ एक व्यापक ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (Line of Credit) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो सेशेल्स में सतत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा.
  • न्यायिक और प्रशासनिक सहयोग: दोनों देशों के बीच एक प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) को अंतिम रूप दिया गया, जो सुरक्षा एजेंसियों के बीच कानूनी तालमेल को बढ़ाएगी और आतंकवाद व वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगी.

‘सागर’ सिद्धांत का व्यावहारिक क्रियान्वयन और समुद्री सुरक्षा

सेशेल्स को तीव्र गश्ती पोत, लेजर रेडियल नौकाओं की आपूर्ति और उनके डोर्नियर विमान व पीएस जोरोएस्टर का तकनीकी अपग्रेडेशन भारत के ‘सागर’ (SAGAR) सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है.

भारत-सेशेल्स रक्षा आपूर्ति आव्यूह:
+---------------------------+-----------------------------------+
| आपूर्ति/अपग्रेड किया गया एसेट  | परिचालनगत लक्षित क्षेत्र           |
+---------------------------+-----------------------------------+
| तीव्र गश्ती पोत            | समुद्री डकैती व तस्करी विरोधी अभियान |
| 5 लेजर रेडियल नौकाएं      | तटीय क्षेत्रों में सामरिक गश्त      |
| डोर्नियर ग्लास कॉकपिट     | लंबी दूरी की हवाई EEZ निगरानी     |
| पीएस जोरोएस्टर रिफिट       | गहरे समुद्र में निरंतर नौसैनिक ऑपरेशन|
+---------------------------+-----------------------------------+

सेशेल्स तटरक्षक बल की क्षमता में वृद्धि करके भारत किसी भी सैन्य अड्डे के निर्माण की आक्रामक होड़ में शामिल हुए बिना, इस क्षेत्र में अवैध व अनियमित शिकार (IUU Fishing), मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसे खतरों को रोकने में मदद कर रहा है.

जलवायु न्याय और ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व

सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने जलवायु न्याय (Climate Justice) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक रूप से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में नगण्य योगदान देने के बावजूद छोटे द्वीपीय राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के सबसे विनाशकारी परिणामों को झेल रहे हैं. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक जलवायु कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्षता, उत्तरदायित्व और समानता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए. यह दृष्टिकोण यूएनएफसीसीसी (UNFCCC) और भारत के नेतृत्व वाले ‘आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन’ (CDRI) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है.

भू-रणनीतिक संतुलन और ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ का प्रतिकार

पश्चिमी हिंद महासागर वैश्विक ऊर्जा गलियारों और व्यापारिक जहाजों के आवागमन के लिए एक मुख्य मार्ग है. हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में चीन ने अपनी ‘मैरीटाइम सिल्क रोड’ और ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls Strategy) रणनीति के तहत अपनी नौसैनिक उपस्थिति और बुनियादी ढांचों का तेजी से विस्तार किया है.

इस पृष्ठभूमि में, भारत की सहयोग नीति—जो किसी देश को कर्ज के जाल में फंसाने के बजाय आपसी सम्मान, विश्वास और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है—द्वीपीय राष्ट्रों के लिए एक बेहतर विकल्प प्रस्तुत करती है. सेशेल्स, मॉरीशस और मालदीव के साथ मजबूत संस्थागत संबंध बनाकर भारत इस क्षेत्र में एकतरफा सैन्य प्रभुत्व को रोकने और समुद्री सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में सफल रहा है.

बिहार कनेक्शन: मानव पूंजी और वैश्विक प्रेषण (Remittance) नेटवर्क

यद्यपि समुद्री सुरक्षा समझौते भौगोलिक रूप से तटीय क्षेत्रों में लागू होते हैं, परंतु उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव बिहार जैसे अंतर्देशीय (Inland) राज्यों तक पहुंचते हैं. पिछले कुछ दशकों में, बिहार से बड़ी संख्या में कुशल तकनीकी पेशेवर, शिक्षक, आईटी विशेषज्ञ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वीपीय देशों और पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्रों में रोजगार के लिए गए हैं.

यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल भुगतान नेटवर्क के विस्तार और प्रत्यर्पण संधियों के लागू होने से सेशेल्स और उसके आस-पास के क्षेत्रों में काम कर रहे बिहार के प्रवासियों को प्रत्यक्ष विधिक और वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होती है. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल और सस्ती होने से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले प्रेषण प्रवाह (Remittance Flows) को मजबूती मिलती है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार है.

आगे की राह (Way Forward)

विक्टोरिया शिखर सम्मेलन के राजनयिक लाभों को बनाए रखने और 19 समझौतों के दीर्घकालिक क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भारत को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  • परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन: एग्जिम बैंक की लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत स्वीकृत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि भारत की संस्थागत विश्वसनीयता बनी रहे.
  • संयुक्त समुद्री सुरक्षा केंद्र की स्थापना: डोर्नियर विमानों और उपग्रहों से प्राप्त होने वाले रीयल-टाइम रिमोट सेंसिंग डेटा के विश्लेषण के लिए विक्टोरिया में एक स्थायी संयुक्त सूचना-संलयन केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए.
  • ‘ब्लू इकोनॉमी’ फेलोशिप का विस्तार: सेशेल्स के युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भारत के प्रमुख समुद्र विज्ञान और समुद्री जीव विज्ञान संस्थानों में विशेष फेलोशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं.
  • नियमित संयुक्त गश्त का आयोजन: समुद्री सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना और सेशेल्स तटरक्षक बल के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों और समन्वित EEZ गश्त के दायरे को और बढ़ाया जाना चाहिए.

Relevance for UPSC and SSC Examinations

यूपीएससी प्रश्नपत्र और विषय कवरेज

  • सामान्य अध्ययन-II (GS-II): भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध; भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते; विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का भारत के हितों पर प्रभाव.
  • सामान्य अध्ययन-III (GS-III): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन.

एसएससी परीक्षा के लिए विषय

  • सामान्य जागरूकता: हिंद महासागर क्षेत्र का भूगोल, अंतरराष्ट्रीय राजधानियां, मुद्राएं और राष्ट्राध्यक्षों के नाम.
  • सामयिक घटनाक्रम: अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, सैन्य अभ्यास, द्विपक्षीय संधियां और राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार.

महत्वपूर्ण शब्दावली जो याद रखनी है

  • सागर सिद्धांत (SAGAR Doctrine): “Security and Growth for All in the Region”—हिंद महासागर में समुद्री सहयोग के लिए भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण.
  • ग्लोबल साउथ (Global South): मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के लिए प्रयुक्त शब्द.
  • ग्लास कॉकपिट (Glass Cockpit): विमान का एक ऐसा आधुनिक कॉकपिट जहाँ पारंपरिक मैकेनिकल गेज के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन का उपयोग किया जाता है.
  • ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy): महासागरीय पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के साथ-साथ समुद्री वाणिज्य, नौवहन और सतत विकास को बढ़ावा देने का आर्थिक मॉडल.

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