भारत के विदेश मंत्री S. जयशंकर की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक 16 मई 2026 को एक संयुक्त वक्तव्य के बजाय 63-अनुच्छेद वाले अध्यक्षीय वक्तव्य (Chair Statement) के साथ समाप्त हुई — यह महत्त्वपूर्ण अंतर पश्चिम एशिया संघर्ष पर समूह के भीतर असहमति की गहराई का संकेत है। सितंबर 10-11 को निर्धारित भारतीय BRICS अध्यक्षता शिखर सम्मेलन से पहले यह बैठक एक मूलभूत विभाजन को उजागर करती है: ईरान और UAE — दोनों 2023 के जोहान्सबर्ग विस्तार के बाद BRICS सदस्य — प्रभावी रूप से एक दूसरे के साथ सैन्य संघर्ष की स्थिति में हैं।
ब्राज़ील के विदेश मंत्री माउरो वियेरा ने इस तनाव को BRICS की कमज़ोरी की बजाय उसके महत्त्व का प्रमाण बताया: “यह समूह की समृद्धि है, क्योंकि यहाँ ऐसी जगह और स्थान है जहाँ बातचीत और संवाद हो सके।” उनका आशावादी दृष्टिकोण — कि BRICS सितंबर शिखर सम्मेलन तक एक सामान्य स्थिति पर पहुँचेगा — राजनयिक आशा और भारत के समक्ष गहरे विभाजित बहुपक्षीय मंच की अध्यक्षता की भारी चुनौती दोनों को दर्शाता है।
UPSC अभ्यर्थियों के लिए यह विकास BRICS के एक गोल्डमैन सैक्स आर्थिक अवधारणा से भू-राजनीतिक समूह तक के विकास; बहुध्रुवीय विश्व में बहुपक्षीय सहमति की चुनौतियों; BRICS के भीतर भारत के रणनीतिक हित; और क्षेत्रीय संघर्षों तथा वैश्विक संस्थागत ढाँचे के अंतर्संबंध को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि एवं संदर्भ: एक आर्थिक अवधारणा से भू-राजनीतिक संस्था तक
पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु
- BRICS की उत्पत्ति 2001 में गोल्डमैन सैक्स की एक आर्थिक वर्गीकरण अवधारणा के रूप में हुई, 2009 में पहले BRIC शिखर सम्मेलन के साथ यह एक अंतर-सरकारी मंच बना और 2010 में दक्षिण अफ्रीका के समावेश से BRICS बना — एक आर्थिक समूह से स्पष्ट भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं वाले समूह में विकसित होते हुए।
- जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन 2023 में BRICS का ऐतिहासिक विस्तार हुआ जिसमें ईरान, UAE, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया और सऊदी अरब को शामिल किया गया — इससे समूह लगभग दोगुना हो गया परंतु तीव्र भिन्न विदेश नीति अभिमुखताओं वाले सदस्य भी शामिल हो गए।
- BRICS सदस्य अब विश्व की लगभग 40% जनसंख्या, वैश्विक GDP (PPP) का लगभग 30% और विश्व की भूमि का 40% से अधिक प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समूह को पर्याप्त आर्थिक और जनसांख्यिकीय भार देता है।
- 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता एक विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण क्षण पर आती है: पश्चिम एशिया संघर्ष, समूह के भीतर ईरान-UAE टकराव और डी-डॉलरीकरण पहलों पर ट्रम्प की 100% शुल्क धमकियाँ सभी भारत के राजनयिक प्रबंधन पर दबाव डालती हैं।
- “संयुक्त वक्तव्य” और “अध्यक्षीय वक्तव्य” के बीच का अंतर राजनयिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है: संयुक्त वक्तव्य के लिए सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक है, जबकि अध्यक्षीय वक्तव्य केवल अध्यक्ष देश का सारांश प्रस्तुत करता है।
BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक चर्चा मंच के रूप में आरंभ हुआ। मूल पाँच सदस्य वैश्विक शासन संस्थाओं — UN सुरक्षा परिषद, IMF, विश्व बैंक और WTO — में सुधार की साझा आकांक्षा से एकजुट थे। समय के साथ ठोस संस्थागत ढाँचा उभरा: 2014 में शंघाई मुख्यालय वाला न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और $100 बिलियन का Contingent Reserve Arrangement (CRA)।
BRICS के भीतर पश्चिम एशिया की दरार
28 फरवरी 2026 को आरंभ हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष अपनी स्थापना के बाद से BRICS की आंतरिक एकजुटता के लिए सबसे तीव्र चुनौती प्रस्तुत करता है। ईरान — अब एक BRICS सदस्य — अमेरिकी-इज़रायली गठबंधन के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में है, 8 अप्रैल से एक नाज़ुक युद्धविराम लागू है। UAE — भी एक BRICS सदस्य — अमेरिका के साथ निकटता से संरेखित है।
ब्राज़ील के माउरो वियेरा ने इसे “मुख्य मुद्दा” लेकिन “समूह की समृद्धि” भी बताया — एक राजनयिक रूप से सावधान कथन। ब्राज़ील ने स्वयं गाज़ा में नागरिक आबादी पर इज़रायली हमलों की तीखी आलोचना की है, ब्राज़ीली नागरिकों सहित बच्चों की मौतों का उल्लेख करते हुए।
भारत की स्थिति विशेष रूप से नाज़ुक है। BRICS अध्यक्ष और सितंबर शिखर सम्मेलन के मेज़बान के रूप में, भारत को एक ऐसे समूह का प्रबंधन करना है जिसके दो सदस्य प्रभावी रूप से एक-दूसरे के साथ युद्ध में हैं। भारत की अपनी रणनीतिक रुचियाँ — खाड़ी देशों पर ऊर्जा निर्भरता, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी, ईरान के साथ सतर्क संलग्नता (विशेषकर चाबहार बंदरगाह के संदर्भ में) और “रणनीतिक स्वायत्तता” की प्रतिबद्धता — का अर्थ है कि वह किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह से संरेखित नहीं हो सकता।
डी-डॉलरीकरण: यथार्थ और वाकपटुता के बीच
BRICS के सबसे चर्चित विषयों में से एक डी-डॉलरीकरण है। डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS सदस्यों को 100% शुल्क की धमकी दी है यदि वे अमेरिकी डॉलर को प्रतिस्थापित करने के लिए वैकल्पिक मुद्रा या भुगतान प्रणाली बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। ब्राज़ील के वियेरा ने सावधानीपूर्वक स्पष्ट किया: “राष्ट्रपति लूला ने कभी डी-डॉलरीकरण या BRICS मुद्रा के निर्माण की बात नहीं की।”
यह अंतर महत्त्वपूर्ण है। स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार की अवधारणा — जिसे भारत रूस के साथ तेल व्यापार के संदर्भ में सक्रिय रूप से अनुसरण कर रहा है — BRICS मुद्रा बनाने या SWIFT के विकल्प से कानूनी और संस्थागत रूप से बहुत भिन्न है। NDB की अधिकांश उधारी अभी भी डॉलर में होती है क्योंकि उधार लेने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार भुगतान के लिए डॉलर की ज़रूरत होती है।
बिहार से संबंध
बिहार का BRICS और पश्चिम एशिया भू-राजनीति से संबंध मुख्यतः श्रम प्रवास चैनल के माध्यम से प्रकट होता है। बिहार पश्चिम एशिया में श्रमिक भेजने वाले शीर्ष राज्यों में है, और BRICS-संबद्ध खाड़ी देश — विशेष रूप से UAE — लाखों भारतीय श्रमिकों का, जिनमें कई बिहारी हैं, आश्रय स्थल हैं। BRICS की संस्थागत स्वास्थ्य और NDB की ऋण क्षमता बिहार की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं — सड़कें, रेलवे, सिंचाई, स्मार्ट सिटी — के लिए NDB वित्तपोषण आकर्षित करने की आकांक्षा से सीधे जुड़ी है।
आगे की राह
भारत को अपनी BRICS अध्यक्षता का उपयोग BRICS के भीतर एक विशेष पश्चिम एशिया संवाद ट्रैक आयोजित करने के लिए करना चाहिए। NDB को गैर-डॉलर मुद्राओं — विशेषकर भारतीय रुपये, चीनी युआन और ब्राज़ीलियन रियाल — में ऋण का हिस्सा बढ़ाने का आग्रह किया जाना चाहिए। भारत को सितंबर शिखर सम्मेलन को विशिष्ट परिणामों — NDB शासन संरचना, BRICS जलवायु वित्त रूपरेखा, डिजिटल अर्थव्यवस्था सहयोग समझौता — के इर्द-गिर्द केंद्रित करना चाहिए।
UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
UPSC प्रश्नपत्र: GS-II (अंतरराष्ट्रीय संबंध — बहुपक्षीय संस्थाएँ, भारत की विदेश नीति, पश्चिम एशिया), निबंध (21वीं सदी में बहुपक्षवाद)
SSC विषय: सामान्य जागरूकता — अंतरराष्ट्रीय संगठन, भारत के विदेशी संबंध
याद रखने योग्य प्रमुख शब्द: BRICS, NDB, CRA, जोहान्सबर्ग विस्तार, अध्यक्षीय बनाम संयुक्त वक्तव्य, डी-डॉलरीकरण, बहु-संरेखण, चाबहार बंदरगाह, BRICS+ प्रारूप, द्विराष्ट्र समाधान, ऑपरेशन सिंदूर