स्वच्छ कोयला संक्रमण: राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन का विश्लेषण

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं (पंचामृत लक्ष्य) के बीच संतुलन बनाने के लिए, केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन’ (National Coal Gasification Mission) में तेजी ला दी है। इस पहल का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयले का गैसीकरण करना है। UPSC और SSC अभ्यर्थियों के लिए, यह नीति भारत के ऊर्जा मैट्रिक्स में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है—कोयले के प्रत्यक्ष दहन (combustion) से हटकर उसके “रासायनिक रूपांतरण” की ओर बढ़ना।

यह नीति आज विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि भारत “ऊर्जा त्रय” (Energy Trilemma) का सामना कर रहा है: ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, सामर्थ्य बनाए रखना और स्थिरता प्राप्त करना। कोयले को सिनगैस (Syngas) में परिवर्तित करके, जिसका उपयोग हाइड्रोजन, उर्वरक (यूरिया) और रसायनों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है, भारत का लक्ष्य प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादों के अपने भारी आयात बिल को कम करना है।

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पृष्ठभूमि और संदर्भ भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार है, फिर भी वह प्राकृतिक गैस का शुद्ध आयातक बना हुआ है। कोयला गैसीकरण एक “मध्य-मार्गी” तकनीक है जो पारंपरिक दहन की तुलना में पर्यावरणीय पदचिह्न (environmental footprint) को काफी कम करते हुए घरेलू कोयले के निरंतर उपयोग की अनुमति देती है।

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखता है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र द्वारा पायलट परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है।
  • कोयला गैसीकरण एक थर्मो-केमिकल प्रक्रिया है जो कोयले को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H2) के मिश्रण में बदल देती है, जिसे सिनगैस कहा जाता है।
  • यह तकनीक “राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन” के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अल्पावधि में “ब्लू हाइड्रोजन” का उत्पादन कर सकती है।
  • सरकार गैसीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले कोयले के राजस्व हिस्से (revenue share) पर 50% की छूट प्रदान कर रही है।

आर्थिक और भू-राजनीतिक आयाम मेथनॉल और इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए घरेलू कोयले का उपयोग करके, भारत अस्थिर वैश्विक एलएनजी (LNG) बाजार पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। यह विशेष रूप से वर्तमान पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से, यह एक “कोयला-से-रसायन” (Coal-to-Chemicals) उद्योग को बढ़ावा देता है, जिससे इंजीनियरिंग और रासायनिक प्रसंस्करण में उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा होते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन कैप्चर हालांकि गैसीकरण दहन की तुलना में स्वच्छ है, फिर भी यह CO2 पैदा करता है। हालांकि, गैसीकरण प्रक्रिया पारंपरिक ग्रिप गैस की तुलना में “कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज” (CCUS) को आसान बनाती है। यह मिशन स्थानीय स्तर पर यूरिया और डीएपी (DAP) के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत के “नेट जीरो 2070” लक्ष्य के साथ जुड़ता है।

बिहार कनेक्शन: बरौनी और उर्वरक क्षेत्र का पुनरुद्धार बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था यूरिया की समय पर उपलब्धता पर निर्भर है। गैसीकरण मिशन का बरौनी में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) संयंत्र के विस्तार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि ये संयंत्र कोयला-गैसीकरण आधारित फीडस्टॉक पर स्थानांतरित होते हैं, तो यह बिहार के किसानों के लिए सस्ते उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

कार्यान्वयन में चुनौतियां प्राथमिक चुनौती गैसीकरण संयंत्रों के लिए आवश्यक उच्च पूंजीगत व्यय (CAPEX) है। इसके अतिरिक्त, भारतीय कोयले में राख की मात्रा अधिक (35-45%) होती है, जिसके लिए चीन या अमेरिका में उपयोग किए जाने वाले निम्न-राख वाले कोयले की तुलना में विशेष गैसीकरण तकनीक की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  • वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF): “कोयला-से-तरल” (CTL) प्रौद्योगिकियों में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए VGF बढ़ाएं।
  • तकनीकी स्वदेशीकरण: भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल गैसीफायर विकसित करने के लिए भेल (BHEL) जैसे संस्थानों का समर्थन करें।
  • हब-एंड-स्पोक मॉडल: रसद लागत को कम करने के लिए कोयला क्षेत्रों (जैसे बिहार के निकट झरिया-धनबाद बेल्ट) के पास गैसीकरण हब विकसित करें।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक

  • UPSC GS-III: बुनियादी ढांचा: ऊर्जा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण।
  • SSC विषय: भूगोल (कोयला संसाधन), विज्ञान (रासायनिक प्रक्रियाएं), अर्थव्यवस्था (आत्मनिर्भर भारत)।
  • मुख्य शब्द: सिनगैस, ब्लू हाइड्रोजन, CCUS, उच्च-राख कोयला, बरौनी उर्वरक संयंत्र।

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