प्रधानमंत्री मोदी ने रखी ASIP टेक्नोलॉजीज़ के OSAT संयंत्र की आधारशिला: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए मील का पत्थर

1 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एडवांस्ड सिस्टम इन पैकेज टेक्नोलॉजीज़ (ASIP) के OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) संयंत्र की आधारशिला रखी। 460 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ, यह भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत स्वीकृत आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजना है, जो भारत की महत्वाकांक्षी चिप विनिर्माण रणनीति के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह घटनाक्रम सिविल सेवा और एसएससी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता महामारी के बाद के युग में भारत की प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा नीति का एक केंद्रीय स्तंभ बन गई है। दक्षिण कोरियाई प्रौद्योगिकी साझेदार APACT Co. द्वारा समर्थित ASIP संयंत्र, दर्शाता है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन में स्वयं को कैसे स्थापित कर रहा है।

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पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं ने दिसंबर 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत भारत सेमीकंडक्टर मिशन की स्थापना के साथ संस्थागत रूप लिया, जिसका परिव्यय 76,000 करोड़ रुपये है।

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • ASIP टेक्नोलॉजीज़ का OSAT संयंत्र, 460 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ, भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजना है।
  • संयंत्र ने दक्षिण कोरिया की APACT Co. को अपना प्रौद्योगिकी साझेदार बनाया है और इसे प्रतिवर्ष 96 मिलियन चिप्स की उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह संयंत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, डेटा केंद्रों और उच्च गति संचार अनुप्रयोगों के लिए उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • परियोजना से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष उच्च-कुशल नौकरियां और 1,600 से अधिक अप्रत्यक्ष नौकरियां उत्पन्न होने की उम्मीद है, साथ ही कौशल विकास और आपूर्ति श्रृंखला स्थानीयकरण को बढ़ावा मिलेगा।
  • ASIP ने उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग क्षमताओं के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश के साथ अपने 30 एकड़ के संयंत्र के भविष्य के विस्तार की योजना की घोषणा की है।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन का ढाँचा

ISM उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) शैली की सहायता संरचना के तहत कार्य करता है, जो स्वीकृत सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, डिस्प्ले फैब्रिकेशन और OSAT/ATMP इकाइयों के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक कवर करने वाले राजकोषीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।

आर्थिक और रणनीतिक महत्व

सेमीकंडक्टर को अक्सर “21वीं सदी का तेल” कहा जाता है, क्योंकि यह स्मार्टफोन से लेकर रक्षा प्रणालियों और इलेक्ट्रिक वाहनों तक लगभग सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए केंद्रीय है। भारत वर्तमान में अपनी अधिकांश सेमीकंडक्टर आवश्यकताओं का आयात करता है, जो आर्थिक भेद्यता और रणनीतिक जोखिम दोनों उत्पन्न करता है।

शासन एवं क्रियान्वयन चुनौतियाँ

वादे के बावजूद, भारत के सेमीकंडक्टर प्रयास को वास्तविक क्रियान्वयन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: उच्च पूंजी लागत, विदेशी प्रौद्योगिकी साझेदारी पर निर्भरता, निर्बाध उच्च-गुणवत्ता वाली बिजली और जल आपूर्ति की आवश्यकता, और नवोदित उद्योग में कुशल कार्यबल बनाने की चुनौती।

बिहार और पूर्वी भारत आयाम

जबकि बिहार में वर्तमान में ISM के तहत कोई प्रत्यक्ष सेमीकंडक्टर विनिर्माण निवेश नहीं है, बिहार सहित पूर्वी और उत्तरी राज्य, भारत के चिप पारिस्थितिकी तंत्र के परिपक्व होने के साथ डाउनस्ट्रीम इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और सहायक विनिर्माण अवसरों से अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं। बिहार में वर्तमान में किसी भी ISM-स्वीकृत परियोजना का अभाव एक नीतिगत अंतराल को उजागर करता है जिसे राज्य सरकार गुजरात और आंध्र प्रदेश द्वारा दिए गए प्रोत्साहन पैकेजों के समान लक्षित प्रोत्साहन पैकेजों के माध्यम से संबोधित कर सकती है।

तुलनात्मक वैश्विक परिप्रेक्ष्य

ताइवान का TSMC, दक्षिण कोरिया का सैमसंग, और अमेरिका का CHIPS एक्ट राज्य-समर्थित सेमीकंडक्टर विकास के विभिन्न मॉडल दर्शाते हैं। भारत का दृष्टिकोण उन्नत फैब्रिकेशन में तुरंत प्रतिस्पर्धा करने के बजाय सीधे OSAT और पैकेजिंग खंड में छलांग लगाने का प्रयास दर्शाता है।

आगे की राह

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए, इस उद्योग की दशक-लंबी गर्भावधि अवधि को देखते हुए, चुनावी चक्रों से परे निरंतर नीतिगत निरंतरता आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सरकार को बिहार जैसे राज्यों तक लक्षित प्रोत्साहन विस्तारित करने पर विचार करना चाहिए।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

यह विषय GS पेपर-III (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण) के लिए केंद्रीय है। महत्वपूर्ण शब्दावली: भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), OSAT, ATMP, उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI), आत्मनिर्भर भारत।

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