जनगणना 2027 का प्रथम चरण और बिहार के जनसांख्यिकीय दाँव: संसाधन आवंटन, परिसीमन और जनसंख्या डेटा की राजनीति

16 मई 2026 को नई दिल्ली जिले में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के दरवाज़े-दरवाज़े सर्वेक्षण की समाप्ति स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय अभ्यास में एक निर्णायक मोड़ है। 2011 की जनगणना के बाद यह पहली गणना है — इसका अर्थ है कि दो जनगणनाओं के बीच का अंतराल 16 वर्षों का होगा, जो स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे लम्बा अंतर-जनगणना अंतराल है। COVID-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई थी और अब इसे जनगणना 2027 के रूप में पुनर्निर्धारित किया गया है।

बिहार के लिए — जो 2011 में लगभग 10.4 करोड़ की जनसंख्या के साथ देश का तीसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है — यह जनगणना एक साथ प्रशासनिक, राजनीतिक और संवैधानिक परिणाम रखती है। जनगणना वित्त आयोग के सूत्र के अंतर्गत केन्द्रीय वित्तीय हस्तांतरण का निर्धारण करती है, सामाजिक कल्याण योजनाओं की योजना बनाती है, और संसदीय तथा विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का आधार बनती है।

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UPSC मुख्य परीक्षा के GS-I (भारतीय समाज — जनसांख्यिकी, शहरीकरण, प्रवासन), GS-II (शासन — डेटा प्रणाली, वित्त आयोग, परिसीमन) और GS-III (भारतीय अर्थव्यवस्था — विकास नियोजन, कल्याण योजना लक्ष्यीकरण) की दृष्टि से यह विषय केन्द्रीय महत्व का है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ: भारत का जनगणना इतिहास और 2027 का अभ्यास

पाँच महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु

  • जनगणना 2027 में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय नवाचार शामिल हैं: मोबाइल ऐप-आधारित गणना मंच, स्व-गणना पोर्टल, डिजिटल लेआउट मैपिंग (DLM) और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) जो वास्तविक समय में प्रगति की निगरानी करती है।
  • बिहार की 2011 जनसंख्या लगभग 10.4 करोड़ थी और यह 25.1% प्रति दशक की दर से बढ़ रही थी — प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक — जिसका अर्थ है कि 2027 जनगणना में बिहार की राष्ट्रीय जनसंख्या में हिस्सेदारी और बढ़ी होगी।
  • संविधान का 84वाँ संशोधन (2001) 2026 के बाद पहली जनगणना तक संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन को 1971 की जनगणना के आधार पर ही जमाए रखता है — इसका अर्थ है कि जनगणना 2027 के बाद एक नया परिसीमन आयोग गठित होगा जो बिहार के लोकसभा सीटों की संख्या को प्रभावित कर सकता है।
  • 16वाँ वित्त आयोग, जो 2026-31 के लिए संसाधन आवंटन निर्धारित करेगा, इस बात पर निर्भर करेगा कि 2011 डेटा का उपयोग जारी रखा जाए या जनगणना 2027 का अंतरिम डेटा अपनाया जाए — बिहार के लिए यह निर्णय वार्षिक हजारों करोड़ रुपये के अंतर का कारण बन सकता है।
  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR), जो जनगणना के साथ तैयार किया जाएगा, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जोड़े जाने की आशंकाओं के कारण बिहार सहित कई राज्यों में विवादास्पद बना हुआ है।

संवैधानिक ढाँचा: जनगणना, परिसीमन और 84वाँ संशोधन

जनगणना कराने की शक्ति संघ सूची (सातवीं अनुसूची) की प्रविष्टि 69 के अंतर्गत केन्द्र सरकार के पास है। जनगणना अधिनियम, 1948, और जनगणना नियम, 1990, इसका सांविधिक ढाँचा प्रदान करते हैं। भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं, नामित प्राधिकरण हैं।

84वाँ संशोधन (2001) महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने 2026 के बाद पहली जनगणना तक संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन को 1971 की जनसंख्या के आधार पर ही स्थिर रखा। बिहार के लिए यह एक दोधारी तलवार है: एक ओर, 1971 से 2027 तक की विशाल जनसंख्या वृद्धि यह सुझाती है कि बिहार को लोकसभा में अधिक सीटें मिलनी चाहिए; दूसरी ओर, परिसीमन में दक्षिण भारतीय राज्यों — जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अधिक सफलता पाई — की सीटें कम हो सकती हैं, जिससे राजनीतिक जटिलता बढ़ेगी।

बिहार की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल और जनगणना का महत्व

बिहार की जनसांख्यिकीय विशेषताएँ इसे जनगणना 2027 के लिए एक विशेष महत्वपूर्ण केस स्टडी बनाती हैं। राज्य की जनसंख्या घनत्व 1,100 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक है, कुल प्रजनन दर (TFR) लगभग 3.0 है जो राष्ट्रीय औसत 2.0 से काफी अधिक है, निर्भरता अनुपात उच्च है और साक्षरता एवं कार्यबल भागीदारी में लैंगिक असमानताएँ महत्वपूर्ण हैं।

विशेष रूप से, बिहार से अनुमानित 3-4 करोड़ प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों में — विशेषतः दिल्ली NCR, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में — निवास करते हैं। जनगणना को इन प्रवासियों को या तो उनके मूल स्थान (बिहार) या गंतव्य (अन्य राज्य) में गिनना होगा — यह एक पद्धतिगत चुनौती है जिसे नया मोबाइल ऐप-आधारित मंच पारम्परिक कागज़-आधारित गणना की तुलना में बेहतर ढंग से संभाल सकता है।

जनगणना और वित्त आयोग सूत्र

15वाँ वित्त आयोग (2021-26) राज्यों के बीच क्षैतिज हस्तांतरण के लिए एक मानदंड के रूप में 2011 की जनसंख्या का उपयोग करता है। यदि जनगणना 2027 दर्शाती है कि राष्ट्रीय जनसंख्या में बिहार की हिस्सेदारी 8.6% (2011) से बढ़कर, मान लीजिए, 9.5% हो गई है, तो वित्त आयोग से बिहार को प्राप्त होने वाले वार्षिक हस्तांतरण में हजारों करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है — जो राज्य की विकास व्यय क्षमता को मौलिक रूप से बदल देगी।

NPR विवाद और बिहार की स्थिति

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) जनगणना के साथ तैयार किया जाएगा और इसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जोड़े जाने की आशंकाओं ने राजनीतिक विवाद उत्पन्न किया है। NRC के लिए आवश्यक वृत्तचित्री साक्ष्य (documentary evidence) की आवश्यकता बिहार के ग्रामीण जनसंख्या के लिए असंगत रूप से बोझिल है क्योंकि यहाँ ऐतिहासिक प्रशासनिक कमज़ोरी के कारण दस्तावेज़ी रिकॉर्ड प्रायः अपूर्ण होते हैं।

प्रौद्योगिकीय चुनौतियाँ और क्षेत्रीय अनुभव

दिल्ली जनगणना अनुभव में कई कार्यान्वयन चुनौतियाँ सामने आईं: गणनाकारों पर धोखाधड़ी के आरोप और निवासियों द्वारा प्रवेश से इनकार; लगभग 16,500 घर रिक्त और 3,400 बंद मिले। बिहार के ग्रामीण संदर्भ में — कम इंटरनेट पैठ, सरकारी अधिकारियों में सामाजिक अविश्वास और बड़े प्रवासी जनसंख्या — ये चुनौतियाँ और अधिक गंभीर होंगी।

आगे का मार्ग

जनगणना 2027 अभ्यास में एक सुदृढ़ जन-जागरूकता अभियान शामिल होना चाहिए — बिहार में मैथिली, भोजपुरी और मगही सहित क्षेत्रीय भाषाओं में — जो जनगणना की गोपनीयता गारंटियों और संसाधन आवंटन के लिए इसके लाभों को स्पष्ट रूप से संप्रेषित करे। मोबाइल ऐप-आधारित मंच कम कनेक्टिविटी क्षेत्रों में ऑफलाइन कार्य करने में सक्षम होना चाहिए। प्रवासी मजदूर गणना के लिए एक समर्पित पद्धति विकसित की जानी चाहिए — जिसमें रेलवे यात्री रिकॉर्ड और आधार से जुड़े पते के डेटा का उपयोग संभव है। बिहार राज्य सरकार को स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से गणनाकारों की पहुँच को सुगम बनाना चाहिए।

UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता

UPSC: GS-I (भारतीय समाज — जनसांख्यिकी, शहरीकरण, प्रवासन, लैंगिक असमानताएँ); GS-II (शासन — जनगणना अधिनियम, वित्त आयोग, परिसीमन आयोग, NPR बनाम NRC बहस, 84वाँ संवैधानिक संशोधन); GS-III (विकास नियोजन, कल्याण योजना लक्ष्यीकरण)। SSC: सामान्य जागरूकता (जनगणना इतिहास, जनगणना अधिनियम 1948, वित्त आयोग, परिसीमन, NPR)। मुख्य शब्द: जनगणना अधिनियम 1948, 84वाँ संवैधानिक संशोधन, परिसीमन आयोग, वित्त आयोग, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, NRC, कुल प्रजनन दर, CMMS, DLM, भारत के महारजिस्ट्रार।

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